पटना।बिहार की सियासत में शुक्रवार (31 जुलाई 2026) को एक बेहद अहम घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधान परिषद सदस्य (MLC) देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र विधान परिषद के सभापति को सौंप दिया है।
यह बड़ा फैसला सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के महज 24 घंटे के भीतर आया है। देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद अब राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश का विधान परिषद जाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट के सवाल के बाद एक्शन मोड में आई सरकार
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सुप्रीम कोर्ट की वह सुनवाई मानी जा रही है, जो गुरुवार को हुई थी। शीर्ष अदालत ने बिहार सरकार से सीधे पूछा था कि जब दीपक प्रकाश बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) के सदस्य नहीं हैं, तो वे मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं?
कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद एनडीए (NDA) खेमे में हलचल तेज हो गई और बीजेपी ने अपने एमएलसी देवेश कुमार से त्यागपत्र दिलवाकर खाली सीट का इंतजाम किया, ताकि कोई संवैधानिक संकट न खड़ा हो।
बीजेपी ने दिया ‘त्याग’, सहयोगी दल के मंत्री की बची कुर्सी
दीपक प्रकाश को जब बिहार सरकार में मंत्री बनाया गया था, तब वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। नियमानुसार उन्हें मंत्री बनने के 6 महीने के भीतर सदस्य निर्वाचित होना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद बीजेपी ने अपनी सीट छोड़कर गठबंधन धर्म निभाते हुए सहयोगी दल के मंत्री की कुर्सी बचा ली है। अब सरकार जल्द ही देवेश कुमार की खाली हुई सीट पर उपचुनाव या नामांकन प्रक्रिया के जरिए दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की तैयारी कर रही है।