नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की संभावित वापसी को लेकर बड़ा राजनीतिक और कानूनी बयान सामने आया है। बांग्लादेश के कानून मंत्री एम असदुज्जमां ने स्पष्ट कहा है कि यदि शेख हसीना देश लौटती हैं तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अदालत पहुंचकर आत्मसमर्पण करने का अवसर भी नहीं मिलेगा और कानून के तहत तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
यह बयान उस समय आया है, जब शेख हसीना ने हाल ही में एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में कहा था कि वह अपनी जान को खतरा होने के बावजूद इस साल दिसंबर तक बांग्लादेश लौटने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कानून मंत्री बोले- कानून के मुताबिक होगी तत्काल कार्रवाई
कानून मंत्री एम असदुज्जमां ने गुरुवार को कहा कि शेख हसीना को बांग्लादेश लौटने का अधिकार जरूर है, लेकिन कानून अपना काम करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार कानून से बाहर जाकर कोई कदम नहीं उठाएगी, लेकिन जैसे ही वह देश की सीमा में प्रवेश करेंगी, उन्हें कानून के तहत उपलब्ध अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि भले ही वह आत्मसमर्पण करना चाहें, लेकिन उससे पहले ही उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है।
पासपोर्ट रद्द होने पर भी दिया जवाब
जब पत्रकारों ने पूछा कि अंतरिम सरकार द्वारा पासपोर्ट रद्द किए जाने के बाद शेख हसीना बांग्लादेश कैसे लौटेंगी, तो कानून मंत्री ने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत मामला है। उन्होंने दोहराया कि जैसे ही वह बांग्लादेश के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश करेंगी, कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
शेख हसीना ने जताई थी लौटने की इच्छा
एक दिन पहले दिए गए इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा था कि उन्हें अपनी जान का खतरा है और गिरफ्तारी या जेल जाने की आशंका भी है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश लौटना चाहती हैं क्योंकि उनके लोग उन्हें वापस बुला रहे हैं।
इस महीने की शुरुआत में सामने आए कुछ अन्य साक्षात्कारों में भी उन्होंने अपनी पार्टी के सहयोगियों के साथ वर्ष 2026 के अंत तक बांग्लादेश लौटने की संभावनाओं पर चर्चा होने की बात कही थी।
सरकार गिरने के बाद भारत आई थीं शेख हसीना
बांग्लादेश में छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। इसके बाद वह भारत आ गई थीं।
अंतरिम सरकार के कार्यभार संभालने के बाद एक विशेष अदालत ने आतंकवाद निरोधक कानून के तहत कार्यकारी आदेश जारी करते हुए उनकी राजनीतिक पार्टी ‘अवामी लीग’ को भंग कर दिया था।
मृत्युदंड और प्रत्यर्पण की मांग बना बड़ा मुद्दा
वर्ष 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई में भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने नवंबर 2025 में शेख हसीना को मानवता के विरुद्ध अपराधों का दोषी ठहराते हुए अनुपस्थिति में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
इसके बाद वर्ष 2026 में हुए चुनावों में ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ सत्ता में आई और तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद संभाला। नई सरकार लगातार भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। भारत ने इस मामले में कहा है कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत इस अनुरोध पर विचार कर रहा है।