स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games 2026) का रोमांच जारी है। अक्सर खेल प्रेमी ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स के बीच के बारीक अंतर को लेकर उलझन में पड़ जाते हैं।
दोनों ही प्रतियोगिताओं में देश-विदेश के दिग्गज एथलीट मेडल के लिए ज़ोर-आज़माइश करते हैं और दोनों का आयोजन 4 साल में एक बार होता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों आयोजनों के नियम, पहचान और विरासत पूरी तरह अलग हैं? आइए जानते हैं वे 5 बड़े कारण, जो इन दोनों खेलों को एक-दूसरे से अलग बनाते हैं।पहले समझें… क्यों होता है लोगों को कंफ्यूजन?
दोनों खेल प्रतियोगिताओं का ढांचा काफी हद तक एक जैसा दिखता है-भव्य उद्घाटन समारोह (Opening Ceremony), दुनिया भर के एथलीटों का मार्च पास्ट, पदक तालिका (Medal Tally) और पोडियम पर राष्ट्रगान का बजना। यही समानताएं आम दर्शकों के मन में यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या ये दोनों आयोजन एक ही स्तर के हैं?
सच्चाई यह है कि इन समानताओं के पीछे की नीतियां और दायरा बिल्कुल अलग हैं।
1. अलग-अलग आयोजक संस्थाएं (Governing Bodies)
दोनों आयोजनों को संचालित करने वाली संस्थाएं और उनके मुख्यालय पूरी तरह भिन्न हैं:
- ओलंपिक गेम्स: इसका संचालन अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) करती है, जिसका मुख्यालय लोजान (स्विट्जरलैंड) में है।
- कॉमनवेल्थ गेम्स: इसे कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन (CGF) आयोजित करता है। दोनों के नियम और मेजबान शहर चुनने की प्रक्रिया अलग-अलग होती है।
2. भाग लेने वाले देशों का दायरा और अनूठी व्यवस्था
ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेने वाली टीमों का ढांचा सबसे बड़ा अंतर पैदा करता है:
- ग्लोबल बनाम ऐतिहासिक जुड़ाव: ओलंपिक में दुनिया के लगभग 200 से अधिक मान्यता प्राप्त देश भाग लेते हैं। वहीं, कॉमनवेल्थ गेम्स में केवल वही 70-72 देश या क्षेत्र हिस्सा लेते हैं, जो कभी ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा रहे हैं और अब कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस में शामिल हैं।
- ब्रिटेन की टीमों का अनोखा फर्क: ओलंपिक में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड मिलकर एक टीम ‘ग्रेट ब्रिटेन’ के नाम से खेलते हैं। इसके विपरीत, कॉमनवेल्थ गेम्स में ये सभी देश अलग-अलग टीमों के रूप में एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतरते हैं।
3. ‘समर और विंटर’ संस्करण का अंतर
- ओलंपिक गेम्स: यह दो अलग-अलग रूपों में आयोजित होता है— समर ओलंपिक और विंटर ओलंपिक। विंटर ओलंपिक में बर्फ और स्केटिंग से जुड़े खेल (जैसे आइस हॉकी, स्कीइंग) शामिल होते हैं, जिनका आयोजन दो-दो साल के अंतराल पर होता है।
- कॉमनवेल्थ गेम्स: इसका कोई अलग विंटर संस्करण नहीं होता। यह सिर्फ मुख्य ग्रीष्मकालीन (Summer) प्रारूप में ही आयोजित किया जाता है।
4. वैश्विक प्रतिष्ठा और प्रतिस्पर्धा का स्तर
- ओलंपिक मेडल की चमक: खेल जगत में ओलंपिक गोल्ड मेडल को किसी भी खिलाड़ी के करियर की सर्वोच्च उपलब्धि माना जाता है, क्योंकि यहाँ पूरी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों से मुकाबला होता है।
- ‘फ्रेंडली गेम्स’ का माहौल: कॉमनवेल्थ गेम्स को अक्सर ‘फ्रेंडली गेम्स’ (सौहार्दपूर्ण खेल) भी कहा जाता है। यहाँ भी मुकाबला कड़ा होता है, लेकिन वैश्विक दबाव और मान्यता के मामले में ओलंपिक का कद काफी बड़ा माना जाता है।
5. अलग-अलग खेलों की सूची
यद्यपि एथलेटिक्स, तैराकी और बॉक्सिंग जैसे खेल दोनों में सामान्य हैं, लेकिन कई खेल दोनों को अलग बनाते हैं:
- कॉमनवेल्थ के खास खेल: लॉन बॉल्स और नेटबॉल जैसे पारम्परिक खेल कॉमनवेल्थ की पहचान हैं, जो ओलंपिक में नहीं खेले जाते।
- ओलंपिक के नए ज़माने के खेल: ओलंपिक में आधुनिक युवाओं की पसंद को देखते हुए स्केटबोर्डिंग, सर्फिंग और ब्रेकडांसिंग जैसे खेल शामिल किए गए हैं, जो राष्ट्रमंडल खेलों का हिस्सा नहीं हैं।
संक्षेप में कहें तो जहां ओलंपिक गेम्स पूरी दुनिया की खेल प्रतिभाओं का महाकुंभ है, वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स एक ऐतिहासिक जुड़ाव वाले देशों का साझा खेल मंच है। अगली बार जब आप टीवी पर इन दोनों में से किसी खेल का लुत्फ उठाएं, तो इन 5 बुनियादी अंतरों को ध्यान में रखकर खेल के रोमांच का मज़ा लें!