अगस्त 2026 में नेदरलैंड्स और बेल्जियम की संयुक्त मेजबानी में होने वाले FIH हॉकी पुरुष एवं महिला विश्व कप के लिए हॉकी इंडिया ने भारतीय टीम की नई आधिकारिक जर्सी को रीवील कर दिया है। इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह देखने को मिला कि वर्षों से भारतीय हॉकी की पहचान रही पारंपरिक नीली जर्सी की जगह केसरिया “सैफ्रन रंग” को होम किट के रूप में अपनाया गया है। इस फैसले ने खिलाड़ियों, खेल विशेषज्ञों और प्रशंसकों के बीच नई बहस छेड़ दी है।
तिरंगे से प्रेरित है नई जर्सी का डिज़ाइन
हॉकी इंडिया के अनुसार नई जर्सी का डिज़ाइन भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय ध्वज से प्रेरित है। जर्सी का मुख्य रंग गहरा केसरिया रखा गया है, जिस पर मंडला आर्ट और सुदर्शन चक्र से प्रेरित ग्राफिक्स उकेरे गए हैं। वहीं कॉलर और आस्तीन पर नेवी ब्लू रंग की पट्टियां दी गई हैं, जो अशोक चक्र का प्रतीक मानी जा रही हैं। संगठन का कहना है कि इस डिज़ाइन के माध्यम से भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान को आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

वीरेन रसकीन्हा ने फैसले पर उठाए सवाल
नई जर्सी के सामने आते ही भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और ओलंपियन वीरेन रसकीन्हा ने इस बदलाव पर नाराजगी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय खेलों की पहचान लंबे समय से नीले रंग से जुड़ी रही है और बिना किसी मजबूत कारण के इस परंपरा को बदलना उचित नहीं है। उन्होंने इस फैसले को निराशाजनक बताते हुए कहा कि टीम की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना नई शुरुआत करना।

रसकीन्हा ने अपने पक्ष को मजबूत करते हुए अंतरराष्ट्रीय खेलों का उदाहरण भी दिया। उनका कहना था कि जैसे अर्जेंटीना की फुटबॉल टीम अपनी पारंपरिक नीली-सफेद जर्सी और ब्राजील अपनी पीली जर्सी से पहचानी जाती है, उसी तरह भारतीय खेलों की वैश्विक पहचान भी नीले रंग से बनी है। उनके अनुसार, भारतीय टीम को मैदान पर नीली जर्सी में देखना खिलाड़ियों और प्रशंसकों दोनों के लिए भावनात्मक महत्व रखता है।

राजनीति से नहीं, खेल की विरासत से जुड़ा है मुद्दा
सोशल मीडिया पर इस विवाद को राजनीतिक रंग दिए जाने के बाद वीरेन रसकीन्हा ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित नहीं है। उन्होंने कहा कि वह तिरंगे के सभी रंगों का समान सम्मान करते हैं, लेकिन भारतीय हॉकी टीम की पारंपरिक जर्सी खेल इतिहास और खिलाड़ियों की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। उनका उद्देश्य केवल उसी विरासत की रक्षा करना है।
हॉकी इंडिया ने दिया अपना पक्ष
विवाद बढ़ने के बाद हॉकी इंडिया ने भी इस बदलाव पर अपनी प्रतिक्रिया दी। संगठन का कहना है कि केसरिया रंग राष्ट्रीय ध्वज का प्रमुख रंग है, जो साहस, त्याग और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। अधिकारियों के अनुसार, नई जर्सी के माध्यम से टीम को नई ऊर्जा और नई सोच के साथ विश्व कप में उतारने की कोशिश की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बदलाव के पीछे किसी प्रकार की अन्य मंशा नहीं है।
विश्व कप से पहले चर्चा का केंद्र बना मुद्दा
विश्व कप शुरू होने से पहले भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि समय के साथ खिलाड़ी और प्रशंसक इस बदलाव को किस तरह स्वीकार करते हैं। फिलहाल, केसरिया जर्सी को लेकर छिड़ी बहस भारतीय खेल जगत में लगातार सुर्खियां बटोर रही है।