नई दिल्ली: बिहार के सिवान में प्रदर्शन के दौरान एक कांस्टेबल द्वारा AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किए जाने के बाद पुलिस की कार्रवाई और हथियारों के इस्तेमाल को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। घटना के बाद संबंधित कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया। इसके साथ ही यह बहस तेज हो गई कि क्या विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस AK-47 जैसे अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर सकती है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), राज्य पुलिस मैनुअल, गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की गाइडलाइन इस विषय पर क्या कहती हैं, आइए समझते हैं।
क्या विरोध-प्रदर्शन में AK-47 का इस्तेमाल किया जा सकता है?
देशभर में इस संबंध में कोई एक समान केंद्रीय कानून लागू नहीं है, क्योंकि कानून-व्यवस्था राज्य सूची का विषय है। हालांकि BNS, BNSS, विभिन्न राज्यों के पुलिस मैनुअल और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) ऐसे मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश देते हैं।
बिहार पुलिस मैनुअल में क्या है प्रावधान?
बिहार पुलिस मैनुअल और गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार AK-47, INSAS और SLR जैसी ऑटोमैटिक असॉल्ट राइफलों को ‘प्लाटून और सेक्शन आर्म्स’ की श्रेणी में रखा गया है। इनका उपयोग सामान्य कानून-व्यवस्था ड्यूटी में व्यक्तिगत पुलिसकर्मियों द्वारा नहीं किया जा सकता।
इन हथियारों का इस्तेमाल केवल विशेष परिस्थितियों और विशेष इकाइयों तक सीमित है। इनमें स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप (SSG), स्पेशल टास्क फोर्स (STF), स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), नक्सल विरोधी और आतंकवाद निरोधक अभियान चलाने वाली इकाइयां तथा उच्च सुरक्षा जोखिम वाले क्षेत्र शामिल हैं।
वीवीआईपी सुरक्षा में भी सीमित है अनुमति
राज्य सरकारों के परिपत्रों के अनुसार नेताओं, न्यायाधीशों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा में तैनात सामान्य बॉडीगार्ड को भी AK-47 लेकर चलने की अनुमति नहीं होती। ऐसे मामलों में रिवॉल्वर, पिस्तौल और कार्बाइन जैसे कम दूरी के हथियारों के उपयोग का प्रावधान है।
सिवान में आखिर हुआ क्या था?
बिहार पुलिस मुख्यालय के अनुसार, सिवान में प्रदर्शन के दौरान भीड़ से घिरने के बाद कांस्टेबल अभिषेक कुमार ने AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक वह पुलिस अधीक्षक के बॉडीगार्ड के रूप में तैनात थे। घटना के बाद उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई।
BNSS के तहत क्या है बल प्रयोग का प्रोटोकॉल?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और पूर्व दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया निर्धारित है। इसकी शुरुआत बातचीत और चेतावनी से होती है। इसके बाद बैरिकेडिंग, वाटर कैनन, आंसू गैस, लाठीचार्ज और गैर-घातक साधनों जैसे रबर बुलेट का इस्तेमाल किया जाता है।
आग्नेयास्त्रों का प्रयोग केवल अंतिम विकल्प के रूप में किया जा सकता है, जब किसी की जान बचाना आवश्यक हो, आत्मरक्षा में गंभीर खतरा हो या पुलिस के हथियारों के भंडार पर तत्काल खतरा उत्पन्न हो।
वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति क्यों जरूरी है?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार कोई भी कांस्टेबल या अधिकारी मौके पर मौजूद अधिकृत वरिष्ठ अधिकारी या ड्यूटी मजिस्ट्रेट के स्पष्ट आदेश के बिना AK-47 जैसे ऑटोमैटिक हथियार से फायरिंग नहीं कर सकता। बिना अनुमति चेतावनी के तौर पर हवा में फायर करना भी SOP और अनुशासन का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
क्या BNS और BNSS में AK-47 का जिक्र है?
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 में AK-47 या किसी विशेष हथियार का नाम सीधे तौर पर नहीं दिया गया है। हथियारों के उपयोग से जुड़े नियम राज्य पुलिस मैनुअल, पुलिस विनियम और परिचालन प्रक्रियाओं के तहत निर्धारित किए जाते हैं।
AK-47 को पूरे देश में ‘प्रोहिबिटेड बोर’ और उच्च क्षमता वाले हथियार की श्रेणी में रखा गया है। इसका उपयोग मुख्य रूप से विशेष सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान, नक्सल विरोधी अभियान और विशेष कमांडो इकाइयों तक सीमित रहता है।
NHRC की गाइडलाइन क्या कहती है?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि पुलिस फायरिंग, चाहे वह AK-47 से हो या किसी अन्य हथियार से, किसी व्यक्ति की मौत का कारण बनती है तो तत्काल एफआईआर दर्ज करना, स्वतंत्र पुलिस जांच कराना और मजिस्ट्रियल जांच कराना अनिवार्य होता है।