लोकसभा में पेपर लीक विरोधी संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। अखिलेश यादव ने शिक्षा व्यवस्था, NEET पेपर लीक, राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और उत्तर प्रदेश में जौहर यूनिवर्सिटी की स्थिति जैसे मुद्दों को उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
सपा प्रमुख ने तीखा तंज कसते हुए कहा, “जो लोग राम मंदिर में गुप्त दान और चढ़ावे की चोरी नहीं रोक पाए, वे देश में पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या को कैसे रोक पाएंगे?”
“प्रधान का इस्तीफा लेकर प्रधानमंत्री को बचा लिया”
अखिलेश यादव ने धर्मेंद्र प्रधान के संदर्भ में कहा कि सरकार ने शिक्षा मंत्री से जुड़ा राजनीतिक दबाव कम करने के लिए चतुराई दिखाई। उन्होंने कहा कि बीजेपी के सांसद सदन में धर्मेंद्र प्रधान का स्वागत कर रहे थे क्योंकि सरकार ने प्रधान के जरिए एक तरह से प्रधानमंत्री का बचाव कर लिया।
अखिलेश ने भाजपा की शुरुआती राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “मजाक-मजाक में शुरू हुआ ‘कॉकरोच आंदोलन’ अब सरकार के लिए गले की फांस बन चुका है क्योंकि सरकार युवाओं के आक्रोश को भांपने में पूरी तरह नाकाम रही है।”
संसद में अखिलेश यादव के भाषण की 5 बड़ी बातें:
- शिक्षा की नींव पर हमला: सरकार ने 1 लाख से अधिक प्राथमिक स्कूल बंद कर दिए हैं ताकि दलित और पिछड़े वर्ग के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रहें।
- NTA पर सवाल: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में जिन लोगों पर कार्रवाई का दावा किया जा रहा है, सरकार सार्वजनिक करे कि वे कौन थे और उन्हें NTA में किसने शामिल किया था?
- 10वीं-12वीं के पेपर लीक: सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाएं ही नहीं, बल्कि बोर्ड परीक्षाओं के पेपर भी लीक हो रहे हैं, जिसका जवाब सरकार के पास नहीं है।
- पीड़ित परिवारों को 1-1 करोड़ का मुआवजा: NEET पेपर लीक के तनाव में आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के प्रति संवेदना जताते हुए अखिलेश ने पीड़ित परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की।
- एकरंगी सोच से तबाही: एकरंगी विचारधारा के लोग देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने पर तुले हैं।
“इमरजेंसी से भी बदतर हैं आज के हालात”
सदन को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने पुलिसिया कार्रवाई और मानवाधिकार के मुद्दों पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “मैंने इमरजेंसी का दौर नहीं देखा, लेकिन आज जो अन्याय हो रहा है वह इमरजेंसी से भी ज्यादा खतरनाक है। इमरजेंसी के दौर में भी डंडों में करंट नहीं लगाया जाता था, जो आज देखने को मिल रहा है।”
इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार पर रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी को दुर्भावनापूर्ण तरीके से तबाह करने का आरोप भी लगाया।