आज किताब ‘नेपाल CHAPTER – ख़ुफ़िया एजेंसियों और अंडरवर्ल्ड का द्वंद्व’ पढ़ी। सच कहूँ, किताब उठाते समय मेरी धारणा कुछ और थी।
लगा था कि वास्तविक अपराधियों और माफियाओं की कहानियों को अगाथा क्रिस्टी, आर्थर कॉनन डॉयल, सुरेंद्र मोहन पाठक या वेद प्रकाश शर्मा की शैली में एक Crime Thriller की तरह पेश किया गया होगा।
लेकिन कुछ ही पन्ने पढ़ने के बाद एहसास हुआ कि मैं भूल गया था कि इस किताब का लेखक सबसे पहले एक गंभीर और मंझा हुआ पत्रकार है।
यही वजह है कि यह किताब अपराध को सनसनीखेज़ बनाने की कोशिश नहीं करती, बल्कि उसे तथ्यों, विश्लेषण और संदर्भों के साथ Deconstruct करती है।
इसे थ्रिलर की तरह गढ़ा नहीं गया, बल्कि एक अनुभवी अपराध संवाददाता की तरह बुनकर पाठक के सामने रखा गया है। इसकी सबसे बड़ी ख़ूबी यही है कि इसमें Suspense, Thrill और Mystery किसी कृत्रिम कथानक से नहीं, बल्कि वास्तविक घटनाओं और उनके क्रमिक खुलासों से पैदा होते हैं।
यह पुस्तक भारत के संदर्भ में नेपाल की Geo-Criminology का गंभीर अध्ययन प्रस्तुत करती है। साथ ही भारतीय पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियों की Crime Mapping और उनकी कार्यप्रणाली को भी समझने का सफल प्रयास करती है।
इस किताब में आपको एक बेहतरीन Crime Investigation के लगभग सभी तत्व मिलेंगे, अपराधियों की Psychological Depth (मनोवैज्ञानिक परतें), Social Commentary (सामाजिक टिप्पणी), Moral Dilemma (नैतिक द्वंद्व) और Intellectual Puzzle (बौद्धिक पहेली)। यही वजह है कि यह किताब केवल अपराध-कथाओं का संकलन नहीं, बल्कि अपराध-जगत की मानसिकता, राजनीति और तंत्र को समझने का एक गंभीर दस्तावेज़ है।
किताब के कवर पर हिन्दी और अंग्रेज़ी शब्दों का मिश्रण भी आकर्षक है और निश्चित रूप से Generation Z के पाठकों को अपनी ओर खींचने की क्षमता रखता है… लेकिन किताब की भाषा किसी अच्छे हिन्दी अखबार के सधे हुए रिपोर्टर जैसी है।
इसके पन्नों में विक्रम वाही से लेकर बबलू श्रीवास्तव तक, मिर्ज़ा दिलशाद बेग से लेकर दाऊद इब्राहिम तक अनेक अपराध-जगत के किरदार अपनी साज़िशों, नेटवर्क और दास्तानों के साथ मौजूद हैं। साथ ही आईएसआई और भारतीय एजेंसियों के बीच चलने वाले ‘शह और मात’ के ख़ुफ़िया खेल की भी दिलचस्प और तथ्यपरक झलक मिलती है।
यह किताब सही मायने में एक Page Turner है। “संदीप पांडेय की यह पुस्तक 16 जुलाई को हिमयुग्म द्वारा प्रकाशित हुई है। अंडरवर्ल्ड पर आधारित यह उनकी दूसरी किताब है।”यह पुस्तक Amazon के साथ-साथ सभी प्रमुख बुक स्टॉल्स पर उपलब्ध है।”
नवल कांत सिन्हा