बिहार की राजनीति में सीवान छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित तौर पर AK-47 राइफल का इस्तेमाल किए जाने की खबर ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
‘सिपाही बलि का बकरा, असली हुक्मरान कौन?’
पटना में पत्रकारों को संबोधित करते हुए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि इस मामले में महज एक सिपाही (अभिषेक कुमार) को सस्पेंड कर देना काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि 15 साल के निहत्थे बच्चे या प्रदर्शनकारी छात्रों पर एके-47 जैसी घातक राइफल तानने का फैसला कोई सिपाही अकेले नहीं ले सकता। तेजस्वी ने सवाल उठाया कि किस अधिकारी के आदेश पर यह कदम उठाया गया था? उन्होंने इस पूरी घटना की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की पुरजोर मांग की है।
अफसरों को कड़ा अल्टीमेटम
राज्य की नौकरशाही को चेतावनी देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि अधिकारियों को कानून और अपने तय प्रोटोकॉल के तहत ही काम करना चाहिए। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा— “सम्राट चौधरी कब तक हैं और कब चले जाएंगे, कोई नहीं जानता। वे किसी अफसर को बचाने नहीं आएंगे।” उन्होंने अफसरों को आगाह किया कि वे सत्ता के नशे में संवैधानिक सीमाओं और नियमों का उल्लंघन न करें, क्योंकि जवाबदेही आखिर में अधिकारियों की ही तय होगी।
‘जनता और विपक्ष के दबाव में झुकी सरकार’
नीट (NEET) व छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने के बिहार सरकार के फैसले पर तेजस्वी यादव ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह फैसला सरकार ने अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि विपक्ष द्वारा दिए गए कड़े अल्टीमेटम और जनता के भारी दबाव के बाद लिया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि सिर्फ मुकदमे वापस लेना ही काफी नहीं है, बल्कि गोलीकांड के जिम्मेदारों को बेनकाब करना भी उतना ही जरूरी है।
‘बिहार में गुंडाराज बर्दाश्त नहीं’
तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर अपराधियों और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार जेपी, कर्पूरी ठाकुर और लालू प्रसाद यादव की वैचारिक धरती है। यहाँ पुलिस की बर्बरता या तानाशाही रवैये को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक दोषी अधिकारियों की पहचान कर उन पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक विपक्ष शांत नहीं बैठेगा।