नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। लगभग दो महीने तक चले छात्र आंदोलन के बीच दिए गए इस इस्तीफे को कई लोग बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम मान रहे हैं। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान से पहले शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसके पास थी और उन्हें अपना पद क्यों छोड़ना पड़ा था।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। उनके पद छोड़ने के साथ ही मोदी सरकार के कार्यकाल में यह दूसरा अवसर है, जब शिक्षा मंत्री ने बीच कार्यकाल में मंत्रालय छोड़ा है।
धर्मेंद्र प्रधान से पहले कौन थे शिक्षा मंत्री?
धर्मेंद्र प्रधान से पहले शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के पास थी। उन्होंने 7 जुलाई 2021 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। उस समय उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ने का फैसला किया था।
रमेश पोखरियाल को मई 2019 में मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया था। इसके बाद जुलाई 2020 में मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया और वह शिक्षा मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे। उनका इस्तीफा मोदी सरकार के बड़े मंत्रिमंडल विस्तार से ठीक पहले हुआ था।
2014 के बाद विवाद के चलते दूसरा मंत्री इस्तीफा देने वाला मामला
साल 2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद यह दूसरा मौका है, जब किसी केंद्रीय मंत्री ने विवाद के बीच पद छोड़ा है। इससे पहले केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने 17 अक्टूबर 2018 को इस्तीफा दिया था। उनके खिलाफ ‘मी टू’ अभियान के दौरान कई महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
इसके अलावा केंद्र सरकार में हुए अन्य इस्तीफे मुख्य रूप से मंत्रिमंडल फेरबदल या संगठनात्मक बदलाव का हिस्सा रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर जश्न
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच उत्साह का माहौल देखा गया। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे आंदोलन की बड़ी सफलता बताया। हालांकि उन्होंने कहा कि संगठन की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं और आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो। उनका कहना है कि इन मांगों के पूरा होने तक आंदोलन का उद्देश्य अधूरा रहेगा।