दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर देश के सबसे चर्चित विरोध-प्रदर्शनों का केंद्र बना हुआ है। बीते 28 जून से NEET पेपर लीक मामले को लेकर सड़कों पर उतरे छात्रों और कार्यकर्ताओं का आंदोलन अब एक नए मोड़ पर पहुँच चुका है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच बढ़ती नाराज़गी अब तस्वीरों और प्रतीकों के ज़रिए सड़कों पर दिखाई देने लगी है।
कैसे बदला आंदोलन का रंग?
19 जुलाई तक शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा यह प्रदर्शन 20 जुलाई को उस वक्त हिंसक हो गया, जब प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन की ओर मार्च करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उन पर सख्त बल प्रयोग किया, जिससे कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं। दूसरी ओर, इस दौरान हुए हंगामे और धक्का-मुक्की में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
क्या है जंतर-मंतर की ‘वॉल ऑफ़ शेम’?
पुलिस की इस कार्रवाई और झड़प के विरोध में अब प्रदर्शनकारियों ने एक अनोखा तरीका अपनाया है। जंतर-मंतर की एक दीवार को ‘वॉल ऑफ़ शेम’ (Wall of Shame) का नाम दिया गया है।
इस दीवार पर 20 जुलाई की घटना से जुड़ी तमाम तस्वीरें, वीडियो-स्टिल्स और पोस्टर चिपकाए गए हैं। इसमें चोटों के निशान, झड़प की तस्वीरें और खून से सनी सड़कों के विजुअल्स शामिल हैं, जिनके ज़रिए प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई की कथित बर्बरता को सार्वजनिक रूप से दर्ज करा रहे हैं।
मौजूदा हालात और सुरक्षा का घेरा
20 जुलाई की घटना के बाद से जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और पूरे इलाके पर पैनी नज़र रखी जा रही है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा लगातार बना हुआ है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी जारी है।