Highlights
- चुनाव आयोग के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) को लेकर पंजाब, कर्नाटक और तेलंगाना में भारी बवाल।
- बीजेपी (BJP) का आरोप— गैर-बीजेपी शासित राज्यों में चुनावी मशीनरी का हो रहा है दुरुपयोग।
- पंजाब में सरकारी योजनाओं के प्रचार तो कर्नाटक-तेलंगाना में नियमों के उल्लंघन का दावा; चुनाव आयोग से शिकायत।
Voter List Special Revision Controversy: वोटर लिस्ट सुधार पर छिड़ी सियासी जंग
नई दिल्ली। देश के तीन बड़े और अहम राज्यों—पंजाब, कर्नाटक और तेलंगाना में चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा चलाए जा रहे वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) यानी विशेष गहन समीक्षा प्रक्रिया को लेकर देश का सियासी पारा गरमा गया है। इन तीनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता में नहीं है और पार्टी ने इन राज्यों की सरकारों पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है।
बीजेपी का दावा है कि चुनाव अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करने के बजाय नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस मामले को लेकर बीजेपी और उसके सहयोगियों ने सीधे चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है।
1. पंजाब: विधानसभा चुनाव से पहले ‘डेटा चोरी’ और योजनाओं के प्रचार का आरोप
पंजाब में कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं, जिससे यहाँ की सियासत सबसे ज्यादा गर्म है। आम आदमी पार्टी (AAP) शासित इस राज्य में बीजेपी ने भगवंत मान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं:
- योजनाओं का प्रचार: बीजेपी प्रदेश नेता केवल सिंह ढिल्लों ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि चुनावी ड्यूटी पर तैनात कुछ अधिकारी एसआईआर की आड़ में पंजाब सरकार की योजनाओं का प्रचार कर रहे हैं और डेटा एकत्र कर रहे हैं।
- गैर-कानूनी दस्तावेजों की मांग: आरोप है कि बूथ लेवल अधिकारी (BLO) किरायेदार वोटर्स से जबरन रजिस्टर्ड रेंट डीड या मकान मालिक का एफिडेविट मांग रहे हैं, जो कि चुनाव आयोग की अनिवार्य सूची में शामिल ही नहीं है।
2. कर्नाटक: ‘घर-घर जाने के बजाय मस्जिदों और कम्युनिटी हॉल में भरे जा रहे फॉर्म’
कांग्रेस शासित कर्नाटक (जहां 2028 में चुनाव होने हैं) में भी विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टी जनता दल सेकुलर (JDS) ने राज्य चुनाव आयोग को साझा शिकायत भेजी है:
- गाइडलाइंस का उल्लंघन: केंद्रीय मंत्रियों प्रह्लाद जोशी, शोभा करंदलाजे और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी का आरोप है कि बीएलओ घर-घर नहीं जा रहे हैं। इसके बजाय कम्युनिटी हॉल, मस्जिदों और बीएलओ के निजी घरों में बैठकर फॉर्म भरवाए जा रहे हैं।
- व्हाट्सएप ग्रुप से खेल: वोटर्स को इन चुनिंदा जगहों पर बुलाने के लिए बकायदा व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। हालांकि, इस पर पलटवार करते हुए डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा है कि सरकार का इस प्रक्रिया में कोई दखल नहीं है।
3. तेलंगाना: रोहिंग्या-अवैध घुसपैठियों की एंट्री और AIMIM कैंपों का विवाद
कांग्रेस शासित तेलंगाना में भी बीजेपी ने एसआईआर प्रक्रिया में राज्य सरकार के हस्तक्षेप का आरोप लगाया है:
बीजेपी नेताओं का बड़ा दावा: प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंदर राव और नेता मारी शशिधर रेड्डी का आरोप है कि हैदराबाद के पुराने शहर (Old City) में अधिकारी घर जाने के बजाय AIMIM नेताओं द्वारा लगाए गए कैंपों में थोक के भाव फॉर्म बांट रहे हैं।
यही नहीं, बीजेपी ने महेश्वरम विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में अवैध घुसपैठियों के नाम शामिल किए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया है। गड़बड़ियों को देखते हुए बीजेपी और बीआरएस (BRS) दोनों ने ही चुनाव आयोग से एसआईआर की समय सीमा को एक महीने आगे बढ़ाने की मांग की है।
क्या होता है ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR)?
चुनाव आयोग समय-समय पर वोटर लिस्ट को पूरी तरह पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) कराता है। इसके तहत बीएलओ को घर-घर जाकर नए वोटर्स के नाम जोड़ने, मृत या ट्रांसफर हो चुके लोगों के नाम हटाने और पते में सुधार करने की जिम्मेदारी दी जाती है। लेकिन तीन राज्यों में विपक्ष के इन तीखे आरोपों के बाद अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है कि वह इन शिकायतों पर क्या एक्शन लेता है।