Highlights
- परिसीमन बिल (Delimitation Bill) को लेकर कांग्रेस ने खोला मोर्चा, मानसून सत्र में ‘इंडिया ब्लॉक’ मिलकर करेगा विरोध।
- कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश का तीखा हमला— “मीडिया में हो रही है गलत खबरों की खेती, बीजेपी के पास नहीं है दो-तिहाई बहुमत।”
- महिला आरक्षण, पेपर लीक और E20 इथेनॉल घोटाले जैसे बड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार।
Congress Strategy for Monsoon Session: परिसीमन बिल पर आर-पार के मूड में विपक्ष
नई दिल्ली। संसद के आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) से पहले देश की सियासत में ‘नंबर गेम’ को लेकर मचे घमासान के बीच कांग्रेस ने एक बड़ा दांव चल दिया है। कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में यह अंतिम फैसला लिया गया है कि विपक्ष आगामी परिसीमन बिल (Delimitation Bill 2026) का संसद में पुरजोर विरोध करेगा।
गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने साफ कर दिया कि ‘इंडिया ब्लॉक’ (INDIA Block) के सभी दल एकजुट होकर इस बिल के खिलाफ खड़े होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) चालाकी और गलत तरीकों से संसद में दो-तिहाई बहुमत (Two-Thirds Majority) जुटाने की कोशिश कर रही है।
‘बीजेपी का दो-तिहाई बहुमत कलंकित बहुमत होगा’-जयराम रमेश
जयराम रमेश ने मीडिया में चल रही एनडीए के दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचने की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तीखे लहजे में कहा:
“विपक्ष में इतनी तोड़फोड़ मचाने के बाद भी लोकसभा में बीजेपी के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है। मीडिया में इस आंकड़े को लेकर गलत खबरों की खेती की जा रही है। अगर बीजेपी किसी तरह यह आंकड़ा पा भी लेती है, तो वह एक ‘कलंकित बहुमत’ होगा।”
कांग्रेस नेता ने साफ किया कि वे इस मुद्दे पर डीएमके (DMK), आम आदमी पार्टी (AAP) और उन सभी विपक्षी दलों के लगातार संपर्क में हैं, जो 17 अप्रैल को उनके साथ खड़े थे। उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके इस मामले में किसी भी कीमत पर बीजेपी का साथ नहीं देगी।
महिला आरक्षण पर कांग्रेस ने रखी ये बड़ी शर्त
परिसीमन बिल और महिला आरक्षण को जोड़ते हुए कांग्रेस ने सरकार के सामने एक स्पष्ट विकल्प रखा है। जयराम रमेश ने कहा कि अगर सरकार बिना किसी देरी या नई शर्तों के, मौजूदा सीटों की संख्या में ही एक-तिहाई (33%) महिलाओं को आरक्षण दे देती है, तो कांग्रेस और पूरा विपक्ष इस कदम का सहर्ष समर्थन करने के लिए तैयार है।
इसके साथ ही उन्होंने शरद पवार गुट (NCP) की नेता सुप्रिया सुले के रुख पर भी स्थिति साफ की। रमेश ने बताया कि सुप्रिया सुले ने उन खबरों का पूरी तरह खंडन कर दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि 50% सीटें बढ़ने की शर्त पर उनकी पार्टी बिल का समर्थन कर सकती है।
घोटाले, पेपर लीक और ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ पर घेराबंदी
मानसून सत्र में विपक्ष केवल परिसीमन बिल ही नहीं, बल्कि कई अन्य ज्वलंत मुद्दों पर भी मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी कर चुका है:
- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहेगा।
- घोटालों पर वार: चंदा चोरी और कथित E20 एथेनॉल घोटाला (जिसमें बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता और उनके बेटे का नाम सामने आने का दावा किया जा रहा है) को संसद में जोर-शोर से उठाया जाएगा।
- संविधान विरोधी नीतियां: जयराम रमेश ने कहा कि ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ पर जेपीसी (JPC) की रिपोर्ट 10 अगस्त तक आनी है, लेकिन यह पूरी तरह संविधान विरोधी है। रिपोर्ट में चाहे जो भी हो, विपक्ष सैद्धांतिक रूप से इसका विरोध करेगा।