- मैदान में उतरे पीके: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर पहली बार खुद लड़ेंगे विधानसभा चुनाव।
- सीट का चयन: पटना की प्रतिष्ठित बांकीपुर विधानसभा सीट से ठोकेंगे ताल।
- प्रशांत किशोर का बयान: उम्मीदवारी स्वीकार करते हुए कहा- “यह उपचुनाव बिहार की मौजूदा सरकार की परीक्षा है।”
- पिछला ट्रैक रिकॉर्ड: पिछले आम चुनाव में जन सुराज को राज्य में सिर्फ 4 फीसदी के करीब वोट मिले थे और पार्टी खाता खोलने में नाकाम रही थी।
पटना। बिहार की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) खुद चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं। ‘जन सुराज’ (Jan Suraaj) पार्टी ने बड़ा दांव खेलते हुए पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव के लिए प्रशांत किशोर को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया है।
बिहार जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बात का औपचारिक ऐलान किया। उन्होंने बताया कि पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया है कि बांकीपुर उपचुनाव में खुद ‘पीके’ पार्टी का चेहरा होंगे।
टिकट मिलने पर बोले प्रशांत किशोर- ‘जीता तो विधानसभा में गूंजेगी जनता की आवाज’
जन सुराज का प्रत्याशी घोषित होने के बाद प्रशांत किशोर ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताया और इस जिम्मेदारी को स्वीकार किया। पीके ने हुंकार भरते हुए कहा:
“मैं पार्टी को धन्यवाद देता हूं और इस जिम्मेदारी को स्वीकार करता हूँ। हम मजबूती से बांकीपुर से चुनाव लड़ेंगे। अगर जनता का आशीर्वाद मिला तो हम जीत दर्ज करेंगे और लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे। यदि मैं जीता, तो विधानसभा के भीतर जनता की आवाज पुरजोर तरीके से उठेगी।”
‘इस चुनाव से सरकार नहीं बदलेगी, लेकिन बिहार को नई दिशा मिलेगी’
प्रशांत किशोर ने इस उपचुनाव को मौजूदा नीतीश-बीजेपी सरकार के लिए एक कड़ा इम्तिहान बताया है। बांकीपुर के मतदाताओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि जनता को काम करने वाले उम्मीदवार को वोट देना चाहिए, चाहे वह कोई भी हो।
पीके ने आगे जोड़ा, “इस उपचुनाव के नतीजों से भले ही बिहार की सरकार न बदले, लेकिन इससे बिहार की राजनीति और पूरे सूबे को एक नई दिशा जरूर मिल सकती है। अब देखना यह है कि जनता क्या फैसला सुनाती है।”
पिछले चुनाव की नाकामी को धोने का बड़ा मौका
गौरतलब है कि बिहार में हुए पिछले मुख्य विधानसभा चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर ने खुद चुनाव न लड़ने का फैसला किया था। उस समय उन्होंने अपना पूरा ध्यान जन सुराज का सांगठनिक ढांचा और आधार मजबूत करने पर लगाया था। हालांकि, जमीनी स्तर पर इतनी मेहनत के बावजूद उनकी पार्टी राज्य में अपना खाता खोलने में पूरी तरह नाकाम रही थी और जन सुराज को महज 4 प्रतिशत के आसपास ही वोट शेयर मिल सका था। ऐसे में बांकीपुर का यह उपचुनाव प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी के राजनीतिक अस्तित्व के लिए बेहद निर्णायक होने वाला है।