उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारे से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हापुड़ जिले में तैनात जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) और 2017 बैच की पीसीएस अधिकारी डॉ. सीमा चौधरी पर सहारनपुर के सरसावा थाने में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह केस किसी विरोधी या बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि खुद उनकी सगी मां ने दर्ज कराया है।
पुलिस ने पीसीएस अधिकारी सहित पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज तैयार करने (जालसाजी) और जान से मारने की धमकी देने जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
1. “मेरी अवैध कमाई छिपाने के लिए किया बैंक खाते का इस्तेमाल”-मां के गंभीर आरोप
सहारनपुर के गांव मीरपुर सीतापुर की रहने वाली मुनेश रानी (अफसर की मां) ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बेहद संगीन आरोप लगाए हैं:
- छिपाकर किया लेन-देन: मां का आरोप है कि आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक में मौजूद उनके खाते को उनकी बेटी डॉ. सीमा चौधरी अपनी ई-मेल आईडी के जरिए खुद संचालित करती थीं और सारे लेन-देन की जानकारी उनसे छिपाई जाती थी।
- खाते में ₹15 लाख का खेल: मुनेश रानी के अनुसार, जब वह खुद बैंक पहुंचीं तब उन्हें पता चला कि उनके खाते में 15 लाख रुपये जमा कराए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह रकम उनकी बेटी ने अपनी ‘अवैध कमाई’ को ठिकाने लगाने और छिपाने के मकसद से उनके खाते में डलवाई थी।
2. जमीन हड़पने की साजिश और जाली दस्तखत का मामला
बैंक खाते के अलावा, मां ने अपनी ही बेटी पर जमीन और संपत्ति हड़पने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार:
- डॉ. सीमा चौधरी ने संजीव कुमार चौधरी, राजेंद्र राणा, गंभीर और नरेश कुमार के साथ मिलकर मुनेश रानी की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया।
- इसके लिए 16 सितंबर 2023 की एक कथित फर्जी रसीद तैयार की गई, जिसमें मां के जाली (फेक) हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया था।
- मिली जान से मारने की धमकी: मुनेश रानी ने बताया कि जब उन्हें तहसील प्रशासन से इस धोखाधड़ी का पता चला और उन्होंने विरोध किया, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। इस मानसिक दबाव के कारण उन्हें आखिरकार अपनी जमीन बेचने पर मजबूर होना पड़ा।
3. डीआईजी के आदेश पर एक्शन; फॉरेंसिक जांच करेगी पुलिस
पीड़ित मां ने बताया कि उन्होंने पहले सरसावा थाने में शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने डीआईजी (DIG Saharanpur) से न्याय की गुहार लगाई। डीआईजी के कड़े निर्देश के बाद पुलिस हरकत में आई और मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिसिया कार्रवाई: मामले की जांच कर रहे अधिकारियों के मुताबिक, मां द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों और सबूतों की गहन पड़ताल की जा रही है। रसीद पर किए गए हस्ताक्षरों की सत्यता जांचने के लिए इसे फॉरेंसिक जांच (Forensic Lab) के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कौन हैं डॉ. सीमा चौधरी? (PCS Officer Profile)
- प्रशासनिक सफर: डॉ. सीमा चौधरी 2017 बैच की प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) अधिकारी हैं। वर्तमान में उनकी तैनाती उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) के पद पर है।
- शैक्षणिक बैकग्राउंड: यूपी की प्रशासनिक सेवा में आने से पहले वह दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
- अफसर का पक्ष: इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद पर डॉ. सीमा चौधरी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और गलत बताया है। उनका कहना है कि उन्हें इस मुकदमे के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है और उनके अपनी मां के साथ संबंध हमेशा से अच्छे रहे हैं।