मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में दांव-पेच और शह-मात का खेल एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। विधान परिषद के उपसभापति पद के चुनाव (Maharashtra Vidhan Parishad Deputy Chairman Election) से ठीक पहले, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को उनके सबसे भरोसेमंद सिपहसालार ने अब तक का सबसे गहरा सियासी जख्म दिया है।
कभी आदित्य ठाकरे के लिए अपनी पारंपरिक वरली विधानसभा सीट हंसते-हंसते त्यागने वाले सचिन अहिर (Sachin Ahir) ने उद्धव गुट का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे का दामन थाम लिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने शिंदे गुट की तरफ से उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है।
MVA ने जेएम अभ्यंकर को बनाया था चेहरा, पर ‘अपनों’ ने ही बिगाड़ा खेल
इस हाई-प्रोफाइल चुनाव के लिए महाविकास आघाड़ी (MVA) ने रणनीति के तहत विधान परिषद सदस्य और जाने-माने शिक्षाविद् जेएम अभ्यंकर (JM Abhyankar) को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया था। उद्धव खेमे को उम्मीद थी कि वे अभ्यंकर के जरिए महायुति को कड़ी टक्कर देंगे, लेकिन नामांकन के आखिरी वक्त पर सचिन अहिर के इस कदम ने विपक्ष के सारे समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है।
एकनाथ शिंदे का ‘मास्टरस्ट्रोक’: नीलम गोरे की जगह सचिन अहिर पर दांव
राजनीतिक गलियारों में लगातार यह कयास लगाए जा रहे थे कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस पद के लिए डॉ. नीलम गोरे को मैदान में उतार सकते हैं। लेकिन आखिरी लम्हों में शिंदे ने ‘सचिन अहिर’ के नाम का पत्ता खोलकर पूरी विपक्षी लॉबी को सन्न कर दिया।
- रणनीतिक सरप्राइज: शिंदे का यह फैसला न सिर्फ महायुति की ताकत को दिखाता है, बल्कि यह उद्धव ठाकरे की बची-खुची कोर टीम में सेंधमारी का एक और बड़ा उदाहरण है।
- बड़ी टूट का संकेत? राजनीतिक पंडितों का मानना है कि सचिन अहिर का यह कदम सिर्फ एक चुनाव तक सीमित नहीं है। कयास लगाए जा रहे हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के कई अन्य विधायक और जनप्रतिनिधि भी जल्द ही शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।
कल (1 जुलाई) होगा महामुकाबला, आज थमेगी प्रक्रिया
विधान परिषद के वरिष्ठ सदस्य राम शिंदे द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस चुनाव का पूरा शेड्यूल इस प्रकार है:
- नामांकन की आखिरी तारीख: 30 जून (मंगलवार) को स्क्रूटनी और नामांकन से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी।
- मतदान की तारीख: 1 जुलाई (बुधवार) को उपसभापति पद के लिए सुबह से वोटिंग की प्रक्रिया शुरू होगी।
शिवसेना और एनसीपी में पहले ही ऐतिहासिक बगावत देख चुके महाराष्ट्र के लिए सचिन अहिर का यह फैसला कोई मामूली पाला बदलना नहीं है।
यह सीधे तौर पर ठाकरे परिवार की उस साख पर हमला है, जिसके लिए सचिन ने कभी अपना राजनीतिक करियर दांव पर लगाया था। अब देखना दिलचस्प होगा कि बुधवार को होने वाले इस चुनाव में जीत का सेहरा किसके सिर बंधता है और उद्धव इस नए संकट से कैसे उबरते हैं।