देश में इस समय पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को लेकर चौतरफा चर्चा हो रही है। पिछले छह महीनों में ईंधन के दामों में आई तेजी से लोग पहले ही परेशान थे, लेकिन इसी बीच आपकी रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाली बुनियादी सब्जियों— टमाटर, प्याज और आलू (TOP) ने चुपके से आपके घर का मासिक बजट बिगाड़ दिया है।
आलम यह है कि देश के कई राज्यों में महज 10 दिनों के भीतर टमाटर की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं, जबकि प्याज के दाम अब आम आदमी की आंखों में आंसू लाने लगे हैं।
मंडी का हाल: जून में आसमान पर पहुंची कीमतें
आमतौर पर मानसून के दस्तक देने के बाद सब्जियों के दाम बढ़ते हैं, लेकिन साल 2026 में जून की शुरुआत से ही कीमतों में आग लगनी शुरू हो गई है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में कीमतें इस प्रकार रिकॉर्ड की जा रही हैं:
| सब्जी का नाम | जून 2026 में औसत तेजी | पहले की कीमत (प्रति किलो) | वर्तमान कीमत (प्रति किलो) |
| टमाटर | 18% की भारी बढ़ोतरी | ₹20 से ₹30 | ₹60 से ₹70 |
| प्याज | 10% से ज्यादा की तेजी | ₹30 से ₹35 | ₹40 से ₹50 |
| आलू | 1.3% से अधिक का इजाफा | ₹25 से ₹30 | ₹30 से ₹40 |
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) यानी खुदरा महंगाई दर में इन तीनों मुख्य सब्जियों की हिस्सेदारी 1.75 फीसदी है, जिसके चलते इनका सीधा असर देश की आर्थिक सेहत पर भी दिखने लगा है।
बारिश से पहले ही क्यों लगी कीमतों में आग? ये हैं 3 बड़े कारण
सब्जी मंडियों के जानकारों के मुताबिक, इस बार कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के पीछे केवल मौसम नहीं, बल्कि चौतरफा फैक्टर्स जिम्मेदार हैं:
- भीषण गर्मी और झुलसी फसल: इस साल अप्रैल से जून के बीच रिकॉर्ड तोड़ तापमान और भीषण गर्मी के कारण टमाटर की खड़ी फसल खेतों में ही झुलस गई। इसके चलते देशव्यापी पैदावार में 10 से 20 फीसदी की भारी गिरावट आई है।
- ईंधन की महंगाई (माल ढुलाई की लागत): बीते महीनों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के कारण ट्रकों का किराया यानी माल ढुलाई (Transportation Cost) काफी महंगी हो गई है। इसका सीधा असर सब्जी की लागत पर पड़ रहा है।
- अल नीनो और मौसम की मार: अल नीनो के प्रभाव और देर से हुई मानसूनी बारिश के कारण कोल्ड स्टोरेज और खेतों में रखी फसलों (विशेषकर आलू और प्याज) को भारी नुकसान पहुंचा है।