नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य तनाव और आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कच्चा तेल फिर 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। हालांकि समुद्री मार्गों पर गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में अब भी दबाव बना हुआ है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़े तनाव ने ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर सीधे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
4 महीने के निचले स्तर से लौटी कीमतें
जानकारों के अनुसार हाल के दिनों में तेल बाजार दबाव में था और कीमतें चार महीने के निचले स्तर तक पहुंच गई थीं। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने बाजार को फिर सहारा दिया है।
बताया गया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर हालिया घटनाक्रम के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी, जिससे कच्चे तेल में रिकवरी देखने को मिली।
हमलों के बाद बढ़ी सप्लाई की चिंता
पिछले कुछ दिनों में क्षेत्र में हुई सैन्य गतिविधियों ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी। समुद्री व्यापार और तेल परिवहन को लेकर बाजार सतर्क बना हुआ है। हालांकि अंतरिम शांति समझौते के बाद जहाजों की आवाजाही में कुछ सुधार देखने को मिला है, लेकिन पर्शियन गल्फ क्षेत्र में अब भी जहाजों की भीड़ बनी हुई है।
इसी वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार अभी पूरी तरह सामान्य स्थिति में नहीं लौट पाया है।
दोहा वार्ता पर टिकी बाजार की नजर
तनाव के बीच अमेरिका और ईरान इस सप्ताह दोहा में प्रस्तावित वार्ता से पहले सैन्य गतिविधियां सीमित करने पर सहमत हुए हैं। निवेशकों की नजर अब इस बैठक पर है क्योंकि इसके नतीजे आगे तेल बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
यदि बातचीत सकारात्मक रहती है तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, जबकि तनाव बढ़ने की स्थिति में फिर तेजी देखने को मिल सकती है।
नेचुरल गैस में भी दिखी बढ़त
कच्चे तेल के साथ-साथ नेचुरल गैस की कीमतों में भी मजबूती दर्ज की गई। ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर अन्य ईंधन श्रेणियों पर भी देखने को मिला है। कारोबार के दौरान कच्चे तेल और गैस दोनों में खरीदारी का रुख बना रहा।