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Indian Press House > Blog > धर्म > उत्तराखंड का प्राचीन जागेश्वर धाम क्यों है इतना खास? 124 मंदिरों वाला यह शिवधाम जानिए धार्मिक मान्यता, इतिहास और महत्व
धर्म

उत्तराखंड का प्राचीन जागेश्वर धाम क्यों है इतना खास? 124 मंदिरों वाला यह शिवधाम जानिए धार्मिक मान्यता, इतिहास और महत्व

vineet verma
Last updated: June 25, 2026 8:10 am
vineet verma
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नई दिल्ली: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम देश के प्रमुख प्राचीन शिव तीर्थों में गिना जाता है। घने देवदार के जंगलों और जटा गंगा नदी के शांत तट पर बसा यह पवित्र धाम अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ गहरी आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए भी जाना जाता है। माना जाता है कि यहां शिवलिंग पूजा की परंपरा की शुरुआत हुई थी, जिसके कारण यह स्थल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है।

Contents
124 से अधिक मंदिरों का अद्भुत समूहइतिहास जो सदियों पुराना बताया जाता हैधार्मिक मान्यताओं में विशेष स्थानश्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र

124 से अधिक मंदिरों का अद्भुत समूह

जागेश्वर धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि 124 से अधिक छोटे-बड़े मंदिरों का विशाल परिसर है। यहां जागेश्वर महादेव मंदिर, महामृत्युंजय मंदिर, नवदुर्गा मंदिर, कालिका मंदिर, सूर्य मंदिर और नीलकंठेश्वर मंदिर प्रमुख रूप से स्थित हैं। मंदिरों की दीवारों पर की गई प्राचीन नक्काशी, शिलालेख और मूर्तियां इस स्थान को ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत का अनूठा संगम बनाती हैं।

इतिहास जो सदियों पुराना बताया जाता है

इतिहासकारों के अनुसार जागेश्वर मंदिर समूह का निर्माण मुख्य रूप से 7वीं से 14वीं शताब्दी के बीच कत्यूरी और चंद शासकों के संरक्षण में हुआ था। यह पूरा मंदिर परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है और उत्तराखंड की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों में शामिल किया जाता है। यहां मौजूद प्राचीन संरचनाएं उस दौर की वास्तुकला और धार्मिक आस्था का जीवंत प्रमाण मानी जाती हैं।

धार्मिक मान्यताओं में विशेष स्थान

जागेश्वर धाम को भगवान शिव की तपोस्थली के रूप में जाना जाता है। कई मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र स्थल का संबंध द्वादश ज्योतिर्लिंगों से भी जोड़ा जाता है। स्कंद पुराण, शिव पुराण और लिंग पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में भी इस क्षेत्र का उल्लेख मिलता है। विशेष रूप से महामृत्युंजय मंदिर में श्रद्धालु दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए पूजा-अर्चना करते हैं।

श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र

हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। प्राकृतिक वातावरण और आध्यात्मिक शांति का यह संगम जागेश्वर धाम को न केवल धार्मिक बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण स्थान बनाता है।

 

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