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NITI Aayog Report: रिकॉर्ड 1.84 ट्रिलियन डॉलर व्यापार के बाद भी क्यों चिंता में है नीति आयोग? जानें चीन पर निर्भरता का पूरा सच

news desk
Last updated: June 23, 2026 5:10 pm
news desk
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भारत का वैश्विक व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इस चमक के पीछे एक ऐसी कड़वी हकीकत छिपी है जिसे नजरअंदाज करना अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक हो सकता है। नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी–मार्च 2026 की तिमाही में भारत का कुल व्यापार 5.4% की ग्रोथ के साथ 1.84 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

Contents
मर्चेंडाइज ट्रेड दबाव में, सर्विस सेक्टर बना ‘संकटमोचक’चीन और रूस से इंपोर्ट बढ़ा, फार्मा सेक्टर में छिपा बड़ा रिस्कफार्मा का कड़वा सच: वॉल्यूम में ‘किंग’, वैल्यू में फिसड्डीएक्सपोर्ट-इंपोर्ट का बदलता पैटर्नवैश्विक चुनौतियां और आगे की राह

लेकिन इस आंकड़े का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि देश का इंपोर्ट (6.5%) अभी भी एक्सपोर्ट (4.2%) के मुकाबले काफी तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। यह सीधा संकेत है कि भारत की बाहरी निर्भरता कम नहीं हुई है और हमारा घरेलू उत्पादन ग्लोबल मार्केट की रेस में पिछड़ रहा है।

मर्चेंडाइज ट्रेड दबाव में, सर्विस सेक्टर बना ‘संकटमोचक’

नीति आयोग के आंकड़े बताते हैं कि भारत का गुड्स (सामान) व्यापार इस समय भारी दबाव में है, जिसे केवल आईटी और डिजिटल सेवाओं के दम पर संभाला जा रहा है:

  • सामान का एक्सपोर्ट घटा: देश का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 2.8% घटकर 112 अरब डॉलर रह गया है।
  • इंपोर्ट में भारी उछाल: इसके विपरीत, सामान का इंपोर्ट 11.9% की भारी बढ़त के साथ 195.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की सुस्ती को दर्शाता है।
  • सर्विस सेक्टर की छलांग: आईटी और डिजिटल सेवाओं के एक्सपोर्ट में 9% की मजबूती आई है, जिससे 111 अरब डॉलर का कुल सर्विस एक्सपोर्ट दर्ज हुआ। इसके चलते मिले 60.4 अरब डॉलर के सरप्लस ने भारत के कुल व्यापार घाटे (Trade Deficit) को बेकाबू होने से बचा लिया।

कुल मिलाकर गुड्स और सर्विसेज को मिलाकर 23.15 अरब डॉलर का घाटा दर्ज हुआ है, जो इस साल का दूसरा सबसे कम आंकड़ा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ सर्विस सेक्टर के भरोसे यह सुधार स्थायी नहीं रह सकता।

चीन और रूस से इंपोर्ट बढ़ा, फार्मा सेक्टर में छिपा बड़ा रिस्क

नीति आयोग की रिपोर्ट में भारत के ट्रेड पार्टनर्स को लेकर एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। भारत अब अपने व्यापार को दुनिया के अलग-अलग देशों में फैला रहा है, जिसके चलते टॉप 10 देशों का एक्सपोर्ट शेयर घटकर 50% रह गया है।

लेकिन इसके बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि चीन और रूस से भारत का इंपोर्ट लगातार बढ़ रहा है। खासकर मैन्युफैक्चरिंग और फार्मा (दवा) सेक्टर में चीन पर निर्भरता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक टाइम बम की तरह है।

फार्मा का कड़वा सच: वॉल्यूम में ‘किंग’, वैल्यू में फिसड्डी

दुनिया की फार्मेसी कहे जाने वाले भारत की ताकत और कमजोरी दोनों इस रिपोर्ट में उजागर हुई हैं। भारत दुनिया को सबसे ज्यादा सस्ती जेनेरिक दवाएं सप्लाई करता है:

  • अफ्रीका की 50% दवाओं की जरूरत भारत पूरी करता है।
  • अमेरिका की 40% और यूके की 25% जरूरतें भारतीय दवाओं से पूरी होती हैं।

असली कमजोरी क्या है? हाई-वैल्यू सेगमेंट जैसे बायोलॉजिक्स, वैक्सीन और एडवांस थेरेपी में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी महज 0.6% के आसपास है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि जीवन रक्षक दवाओं के कच्चे माल यानी API के लिए भारत आज भी 65% चीन पर निर्भर है। इसके अलावा, भारत का रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) खर्च महज 7% है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह 15 से 20% तक होता है।

एक्सपोर्ट-इंपोर्ट का बदलता पैटर्न

कैटेगरीएक्सपोर्ट (बढ़त/गिरावट)इंपोर्ट (बढ़त/गिरावट)
इलेक्ट्रिकल व मिनरल फ्यूल्समजबूत बढ़त दर्ज की गई।मिनरल फ्यूल्स में -11% की गिरावट।
आयरन और स्टील18.4% की शानदार ग्रोथ।स्टील के इंपोर्ट में -16.8% की कमी।
ऑटोमोबाइल (व्हीकल्स)14.2% की अच्छी रफ्तार।घरेलू मांग के अनुसार बदलाव।
गोल्ड और सिल्वरजेम्स-जूलरी एक्सपोर्ट में गिरावट।कीमती धातुओं के इंपोर्ट में 82% का भारी उछाल।

वैश्विक चुनौतियां और आगे की राह

वैश्विक बाजार में इस समय क्रूड ऑयल, कोयला और कीमती धातुओं की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव जारी है। यूएस-चीन ट्रेड वॉर, डब्ल्यूटीओ (WTO) की अनिश्चितताएं और नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) वैश्विक व्यापार के समीकरण बदल रहे हैं।

एक्सपर्ट्स की राय: नीति आयोग की रिपोर्ट पर आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत को वास्तव में एक वैश्विक ट्रेड सुपरपावर बनना है, तो केवल असेंबलिंग या वॉल्यूम बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। भारत को घरेलू स्तर पर हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स, एडवांस टेक्नोलॉजी और आरएंडडी (R&D) पर बड़ा निवेश करना होगा ताकि चीन जैसी बाहरी ताकतों पर से निर्भरता को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

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TAGGED: India China Import Dependency, India Pharma Industry API China, India Trade Deficit 2026, Merchandise Export Decline India., NITI Aayog Report on Indian Economy, Service Sector Export Surplus
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