लखनऊ: राजधानी के अलीगंज इलाके में स्थित एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार हादसे में 14 से अधिक बच्चों की मौत की खबर है, जबकि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। यह हादसा एक बार फिर उन सुरक्षा खामियों को सामने लेकर आया है, जिनकी अनदेखी अक्सर शैक्षणिक संस्थानों और व्यावसायिक भवनों में की जाती है।
जानकारी के मुताबिक आग भवन के ग्राउंड फ्लोर से शुरू हुई और कुछ ही देर में पहली तथा दूसरी मंजिल तक फैल गई। आग पर काबू तो पा लिया गया, लेकिन उससे पहले इमारत के भीतर धुआं और जहरीली गैसें भर गईं। बताया जा रहा है कि अधिकांश बच्चों की मौत आग की लपटों से नहीं, बल्कि दम घुटने के कारण हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों और प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भवन से बाहर निकलने का रास्ता बेहद संकरा था। ऐसे में आपात स्थिति के दौरान बच्चों को सुरक्षित बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका। इस घटना ने कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या होता है शॉर्ट सर्किट और कैसे लगती है आग?
बिजली व्यवस्था में सामान्य रूप से फेज और न्यूट्रल तारों के माध्यम से करंट का प्रवाह होता है। फेज तार से बिजली उपकरणों तक पहुंचती है और न्यूट्रल तार के जरिए वापस लौटती है। लेकिन जब किसी कारणवश फेज और न्यूट्रल तार सीधे संपर्क में आ जाते हैं और उनके बीच प्रतिरोध लगभग समाप्त हो जाता है, तब शॉर्ट सर्किट की स्थिति पैदा होती है।
ऐसी स्थिति में करंट का प्रवाह अचानक कई गुना बढ़ जाता है। अत्यधिक करंट के कारण तारों में तेज गर्मी उत्पन्न होती है, जिससे उनके ऊपर लगी इंसुलेशन परत पिघलने लगती है। इसके बाद चिंगारियां निकलती हैं और यदि आसपास प्लास्टिक, लकड़ी, कागज, पर्दे या फॉल्स सीलिंग जैसी ज्वलनशील सामग्री मौजूद हो तो आग तेजी से फैल सकती है।
किन वजहों से होता है शॉर्ट सर्किट?
शॉर्ट सर्किट के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। सबसे आम वजह ओवरलोडिंग मानी जाती है, जब एक ही विद्युत लाइन या पुरानी वायरिंग पर क्षमता से अधिक एसी, कंप्यूटर और अन्य उपकरण चला दिए जाते हैं।
इसके अलावा निम्न गुणवत्ता वाले या बिना मानक प्रमाणन वाले तारों का इस्तेमाल भी बड़ा जोखिम पैदा करता है। कई मामलों में चूहों द्वारा तारों की इंसुलेशन परत को नुकसान पहुंचाने से भी शॉर्ट सर्किट की घटनाएं सामने आती हैं।
देश में आग की घटनाओं का बड़ा कारण है शॉर्ट सर्किट
देशभर में होने वाली अग्नि दुर्घटनाओं में शॉर्ट सर्किट सबसे बड़ी वजह माना जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत में हर वर्ष आग की घटनाओं में करीब 13 हजार से 15 हजार लोगों की जान चली जाती है। इनमें बड़ी संख्या उन हादसों की होती है, जिनकी वजह विद्युत प्रणाली में खराबी, ओवरलोडिंग या शॉर्ट सर्किट होती है।
उत्तर प्रदेश में भी हर साल शॉर्ट सर्किट से जुड़ी 100 से अधिक बड़ी घटनाएं दर्ज की जाती हैं, जिनमें कई लोगों की मौत और भारी संपत्ति का नुकसान होता है।
कोचिंग सेंटरों के लिए क्या हैं सुरक्षा नियम?
राष्ट्रीय भवन संहिता के तहत कोचिंग सेंटरों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए स्पष्ट सुरक्षा मानक निर्धारित किए गए हैं। नियमों के अनुसार किसी भी ऐसी इमारत में, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहते हैं, कम से कम दो सुरक्षित निकास मार्ग होना अनिवार्य है।
इसके अलावा सीढ़ियां और गलियारे इतने चौड़े होने चाहिए कि आपात स्थिति में लोग बिना भगदड़ के बाहर निकल सकें। भवन के भीतर फायर बैरियर जैसी व्यवस्थाएं भी जरूरी मानी गई हैं ताकि आग एक हिस्से से दूसरे हिस्से में तेजी से न फैल सके।
इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट और फायर एनओसी क्यों जरूरी?
सुरक्षा नियमों के तहत व्यावसायिक और शैक्षणिक भवनों में एमसीबी तथा आरसीसीबी जैसे सुरक्षा उपकरण लगाए जाना आवश्यक है। ये उपकरण शॉर्ट सर्किट या अत्यधिक करंट की स्थिति में स्वतः बिजली आपूर्ति बंद कर देते हैं, जिससे बड़े हादसों की संभावना कम हो जाती है।
नियमों के मुताबिक ऐसी इमारतों का समय-समय पर इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट कराया जाना चाहिए। साथ ही फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (फायर एनओसी) लेना भी अनिवार्य है।
नियमों की अनदेखी पर हो सकती है कड़ी कार्रवाई
यदि जांच में सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो भवन मालिक और संस्थान प्रबंधन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। बिना आवश्यक सुरक्षा मंजूरी और फायर एनओसी के संस्थान संचालित करने पर सीलिंग, जुर्माना और अन्य दंडात्मक प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।