लंदन। ब्रिटेन की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सत्ताधारी लेबर पार्टी के भीतर हफ्तों से चल रहा हाई-वोल्टेज ड्रामा आखिरकार प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर (Keir Starmer) के इस्तीफे के साथ खत्म हो गया है। अपनी ही पार्टी के 100 से अधिक सांसदों की खुली नाराजगी और बगावत के बाद, स्टार्मर ने सोमवार को एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर अपने इस्तीफे का आधिकारिक ऐलान कर दिया।
इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद अब ब्रिटेन में एक बार फिर नए प्रधानमंत्री की रेस शुरू हो गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया बड़ा एलान: पार्टी नेतृत्व भी छोड़ा
सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कीएर स्टार्मर ने साफ किया कि वह न सिर्फ प्रधानमंत्री का पद छोड़ रहे हैं, बल्कि लेबर पार्टी के नेता (Chief of Labour Party) का पद भी त्याग रहे हैं। उन्होंने कहा:
“पार्टी और देश के हित को सर्वोपरि रखते हुए मैं अपने पद से हट रहा हूँ। आने वाले नए प्रधानमंत्री और नेतृत्व को हमारा पूरा सहयोग और समर्थन मिलता रहेगा।”
क्यों दांव पर लगी स्टार्मर की कुर्सी? (The Internal Rebellion)
पिछले कुछ दिनों से लंदन के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज थी कि स्टार्मर की विदाई तय है। लेबर पार्टी के करीब 100 से ज्यादा सांसदों ने उनकी नीतियों और नेतृत्व शैली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। सांसदों की इस नाराजगी ने स्टार्मर के लिए सरकार चलाना नामुमकिन कर दिया था, जिसके बाद आखिरकार उन्हें अपनी ही पार्टी के दबाव के आगे सरेंडर करना पड़ा।
आगामी संसदीय चुनाव में लेबर पार्टी का नया दांव
कीएर स्टार्मर के इस इस्तीफे ने ब्रिटेन की राजनीति की दशा और दिशा बदल दी है। इस फैसले के दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे:
- नया चेहरा: अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि आने वाले ब्रिटिश संसदीय चुनावों में लेबर पार्टी की कमान किसी नए चेहरे के हाथ में होगी।
- पार्टी के सामने साख बचाने की चुनौती: आंतरिक कलह से जूझ रही लेबर पार्टी को चुनाव से पहले जनता के बीच अपनी खोई हुई साख को वापस पाना होगा।
- विपक्ष को मिला मौका: इस अंदरूनी बगावत और पीएम के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का बड़ा मुद्दा मिल गया है।
अनिश्चितता के भंवर में ब्रिटेन
ऋषि सुनक के बाद सत्ता में आई लेबर पार्टी से ब्रिटेन की जनता को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन कीएर स्टार्मर का इतनी जल्दी पद छोड़ना यह दर्शाता है कि ब्रिटेन में राजनीतिक स्थिरता अभी भी एक दूर की कौड़ी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि लेबर पार्टी का अगला कमांडर कौन बनता है और क्या वह इस बिखराव को संभाल पाएगा।