- पूर्व राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने सार्वजनिक किए अमेरिका के बेहद खुफिया बायोलैब दस्तावेज।
- बाइडेन के चीफ मेडिकल एडवाइजर रहे डॉ. एंथनी फौसी पर खुफिया रिपोर्ट्स को प्रभावित करने का गंभीर आरोप।
- ट्रंप प्रशासन के निर्देश पर ODNI ने हटाई फाइलों से गोपनीयता; लैब-लीक थ्योरी का समर्थन करने वाले अधिकारियों को प्रताड़ित करने का खुलासा।
वाशिंगटन। पूरी दुनिया को तबाह करने वाली कोरोना महामारी (Covid-19 Pandemic) की उत्पत्ति को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला आधिकारिक खुलासा हुआ है।
अमेरिका की पूर्व राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड (Tulsi Gabbard) ने पद छोड़ने के ठीक बाद कई बेहद गोपनीय और प्रतिबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दिया है।
इन दस्तावेजों के आधार पर गबार्ड ने आरोप लगाया है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के चीफ मेडिकल एडवाइजर रहे डॉ. एंथनी फौसी (Dr. Anthony Fauci) ने न सिर्फ चीन की वुहान लैब को फंडिंग की थी, बल्कि महामारी की शुरुआत से जुड़े अमेरिकी खुफिया आकलन को भी व्यक्तिगत तौर पर प्रभावित किया था।
‘वर्षों के झूठ और सेंसरशिप का अंत’-तुलसी गबार्ड का बड़ा हमला
राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के दफ्तर (ODNI) द्वारा जारी इन दस्तावेजों ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में भूकंप ला दिया है। यह कदम डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के उस बड़े संकल्प का हिस्सा है, जिसके तहत कोरोना वायरस की उत्पत्ति और इसमें अमेरिकी सरकारी एजेंसियों व वैज्ञानिकों की संदेहास्पद भूमिका की नए सिरे से जांच की जा रही है।
तुलसी गबार्ड ने कड़े शब्दों में कहा, “कोविड-19 महामारी के कारण लाखों अमेरिकियों और दुनिया भर के अनगिनत लोगों को असहनीय दर्द से गुजरना पड़ा। सालों के झूठ, सेंसरशिप और सच को छुपाने के बाद, अब जनता पारदर्शिता और जवाबदेही की हकदार है।” उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. फौसी जैसे रसूखदार लोगों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग छुपाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस (संसद) से कसम खाकर झूठ बोला।
नया कूटनीतिक एंगल: खुफिया एजेंसियों और डॉ. फौसी का ‘नेक्सस’
सार्वजनिक की गई फाइलों से साफ पता चलता है कि जब दुनिया में इस बात पर बहस तेज हो रही थी कि वायरस प्राकृतिक है या वुहान लैब से लीक हुआ है, तब राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग संस्थान (NIAID) के निदेशक के तौर पर डॉ. फौसी खुफिया अधिकारियों के साथ लगातार सीक्रेट कम्यूनिकेशन में थे।
- विशेषज्ञों की सूची प्रभावित की: ओडीएनआई (ODNI) के मुताबिक, फौसी ने खुफिया एजेंसियों को उन वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के नाम सुझाए, जिन्होंने बाद में ‘लैब-लीक थ्योरी’ को खारिज करते हुए इसे प्राकृतिक वायरस बताने वाली कथित ‘वैज्ञानिक सहमति’ तैयार करने में मदद की।
- बाइडेन सरकार की 90 दिनों की समीक्षा: जुलाई 2021 के कुछ आंतरिक ईमेल्स से पता चलता है कि बाइडेन प्रशासन के दौरान कोरोना की उत्पत्ति को लेकर जो 90 दिनों की समीक्षा बैठक हुई थी, उसमें फौसी को ‘सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट’ (SME) मानकर उनकी सुझाई थ्योरी को ही आगे बढ़ाया गया। जबकि साल 2024 में हाउस सिलेक्ट सबकमेटी के सामने फौसी ने ऐसी किसी भी बातचीत से साफ इनकार कर दिया था।
वुहान लैब को लेकर बड़ा खुलासा: ‘इन्वेस्टिगेटर्स को किया गया प्रताड़ित’
सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी की मई 2020 की एक बेहद गोपनीय रिपोर्ट भी शामिल है। इस रिपोर्ट में साफ निष्कर्ष निकाला गया था कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (Wuhan Institute of Virology) में लैब के भीतर मॉडिफाई (बदले गए) किए गए कोरोना वायरस के गलती से लीक होने के पुख्ता हालात मौजूद थे।
ओडीएनआई की रिपोर्ट में उन खुफिया विश्लेषकों और अधिकारियों की गवाही भी शामिल है, जिन्होंने सबसे पहले ‘लैब-लीक हाइपोथीसिस’ (Lab-Leak Hypothesis) का समर्थन किया था। इन अधिकारियों का आरोप है कि सच का साथ देने के कारण उनके खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की गई, उन्हें साइडलाइन किया गया और उनकी आवाज को दबाया गया। गबार्ड ने बताया कि इन गंभीर शिकायतों को आगे की जांच के लिए खुफिया समुदाय के इंस्पेक्टर जनरल के पास भेज दिया गया है।