नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के ताजा बयान ने नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। ईरान, लेबनान और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दिए गए उनके संकेतों को इजरायल के लिए दबाव बढ़ाने वाले संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। खास तौर पर लेबनान और शांति प्रक्रिया पर वेंस की टिप्पणी ने इजरायली नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
वेंस ने साफ कहा कि अमेरिका चाहता है कि क्षेत्र में तनाव का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि बातचीत और समझौते के जरिए निकले। उन्होंने उम्मीद जताई कि इजरायल और लेबनान दोनों मौजूदा समझौते का सम्मान करेंगे और तय शर्तों का पालन करेंगे।
ईरान पर अमेरिका का सख्त लेकिन संतुलित रुख
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अपनी सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसी किसी स्थिति के पक्ष में नहीं है जिसमें ईरान के पास ऐसी मिसाइल क्षमताएं हों जो वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बनें।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान भविष्य में अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा गति देना चाहता है तो उसे इसके लिए बड़े आर्थिक संसाधनों की जरूरत पड़ेगी। अमेरिका इस पूरे ढांचे को अंतिम समझौते की शर्तों के तहत देख रहा है।
लेबनान पर वेंस का बयान क्यों बना चर्चा का विषय?
जेडी वेंस ने दक्षिणी लेबनान की स्थिति पर कहा कि वहां दीर्घकालिक सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण अंततः लेबनान सरकार के हाथों में होना चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका चाहता है कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था और स्थिरता स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था के जरिए कायम हो।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बेरूत में आम नागरिकों को निशाना बनाने जैसी घटनाएं स्वीकार नहीं की जा सकतीं और सभी पक्षों को शांति प्रक्रिया का सम्मान करना होगा।
नेतन्याहू की चिंता क्यों बढ़ सकती है?
इजरायल लंबे समय से दक्षिणी लेबनान को अपनी सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा मानता रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले भी संकेत दे चुके हैं कि जब तक इजरायल को सुरक्षा जोखिम महसूस होगा, तब तक उस क्षेत्र में उसकी सैन्य मौजूदगी बनी रह सकती है।
ऐसे में अमेरिका की ओर से लेबनान सरकार की भूमिका मजबूत करने और समझौते के पालन पर जोर देना इजरायल की रणनीतिक प्राथमिकताओं से अलग संकेत माना जा रहा है। यही वजह है कि वेंस के बयान को ट्रंप प्रशासन की ओर से इजरायल के लिए शुरुआती राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
प्रतिबंधों और समझौते पर क्या बोला अमेरिका?
वेंस ने यह भी कहा कि ईरान को दी जाने वाली संभावित प्रतिबंध राहत को अमेरिका किसी बड़ी छूट के रूप में नहीं देखता। उनके मुताबिक प्रतिबंधों में नरमी के बाद भी वित्तीय गतिविधियों पर निगरानी बनाए रखी जा सकेगी।
उन्होंने संकेत दिया कि कुछ मामलों में कांग्रेस की औपचारिक मंजूरी के बिना भी सीमित अवधि के लिए प्रतिबंधों में राहत संभव हो सकती है। साथ ही यह भरोसा भी दिलाया कि समझौते से जुड़ी जानकारी अमेरिकी संसद के सामने रखी जाएगी।