वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते ने दुनिया को राहत तो दी है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के भविष्य को लेकर अभी भी खींचतान जारी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘टोल-फ्री’ मार्ग के दावे के उलट, ईरान ने अब ‘सुविधा शुल्क’ (Service Fee) का नया कार्ड खेल दिया है।
क्या है पूरा विवाद? ‘टोल’ और ‘फीस’ की जंग
रविवार, 14 जून को राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया था कि ऐतिहासिक समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से खुल चुका है और अब यह ‘टोल फ्री’ रहेगा। ट्रंप का मानना था कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी।
हालांकि, ईरान के ताजा बयान ने इस खुशी पर थोड़ा विराम लगा दिया है। तेहरान का कहना है कि:
- अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सीधे तौर पर ‘टोल’ वसूलना अवैध है।
- लेकिन, ईरान वहां से गुजरने वाले जहाजों को दी जाने वाली ‘सेवाओं’ के बदले शुल्क (Fees) वसूलने का अधिकार रखता है।
महत्वपूर्ण तथ्य: विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल शब्दों का खेल है। जिसे ट्रंप ‘टोल’ कह रहे हैं, ईरान उसे ‘सर्विस फीस’ बताकर अपनी कमाई जारी रखना चाहता है।
ट्रंप का ‘मास्टरस्ट्रोक’ या ईरान की रणनीतिक जीत?
इस समझौते को ट्रंप प्रशासन एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देख रहा है। समझौते की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- नौसैनिक नाकाबंदी का अंत: अमेरिकी नौसेना ईरान के तटों से अपनी नाकाबंदी हटाएगी।
- ऊर्जा सुरक्षा: दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जिसका सुरक्षित रहना ग्लोबल इकोनॉमी के लिए जरूरी है।
- युद्ध का टला खतरा: महीनों से चल रही तनातनी के बाद क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) की संभावना अब कम हो गई है।
लेकिन जानकारों का मानना है कि ईरान ने ‘फीस’ का मुद्दा उठाकर यह साफ कर दिया है कि वह इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण पूरी तरह नहीं छोड़ेगा।
अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
अगर ईरान ‘सुविधा शुल्क’ के नाम पर भारी रकम वसूलता है, तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ेगा।
- शिपिंग कॉस्ट: मालवाहक जहाजों के लिए संचालन लागत बढ़ जाएगी।
- नया उदाहरण: अगर ईरान को शुल्क वसूलने की अनुमति मिलती है, तो यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों (International Waterways) के लिए एक विवादित मिसाल बन सकता है।
‘फूल’ भी हैं और ‘कांटे’ भी
ट्रंप के लिए यह डील उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति की सफलता है, जिससे तेल की कीमतें गिर सकती हैं और चुनाव से पहले उन्हें बढ़त मिल सकती है। वहीं, ईरान के लिए यह आर्थिक प्रतिबंधों और नाकाबंदी से सांस लेने का मौका है।
लेकिन सवाल वही है: क्या ‘टोल-फ्री’ का सपना हकीकत बनेगा, या ‘सर्विस फीस’ के रूप में नया विवाद जन्म लेगा? आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी प्रशासन ईरान के इस ‘फीस’ वाले पैंतरे पर क्या प्रतिक्रिया देता है।