पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस वक्त हालात बेकाबू हो चुके हैं। पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ शुरू हुआ नागरिकों का विरोध प्रदर्शन अब एक खूनी विद्रोह का रूप ले चुका है।
कश्मीरी और सिंधी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने अब इस दमन चक्र को रोकने के लिए भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र (UN) से सीधे सैन्य व कूटनीतिक हस्तक्षेप (Intervention) की गुहार लगाई है।
इधर, नई दिल्ली में भारत सरकार ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद सख्त रुख अपनाया है।
‘अपनों’ पर ही गोलियां बरसा रही पाक सेना, 27 की मौत!
पीओके के मुजफ्फराबाद, रावलकोट, पुंछ, मीरपुर और नीलम घाटी जैसी जगहों से दिल दहला देने वाली खबरें आ रही हैं। स्थानीय संगठनों का आरोप है कि पाकिस्तानी हुकूमत वहां ‘नरसंहार’ पर उतर आई है:
- भारी जानी नुकसान: अब तक हुई हिंसक झड़पों में 27 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
- डिजिटल ब्लैकआउट: सच को दुनिया के सामने आने से रोकने के लिए पूरे पीओके में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क को पूरी तरह ठप (Ban) कर दिया गया है।
- लंदन में फूटा गुस्सा: पाकिस्तान की इस बर्बरता की गूंज सिर्फ कश्मीर में नहीं, बल्कि सात समंदर पार ब्रिटेन में भी सुनाई दी। लंदन में पाकिस्तानी हाई कमीशन के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने पाक सेना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सिंधी नेता की भारत से भावुक अपील: “हमें बचाइए”
‘जाय सिंध मुत्ताहिदा महाज’ (JSMM) के चेयरमैन शफी बुरफत ने एक वीडियो संदेश जारी कर भारत समेत पूरी दुनिया से पाकिस्तानी सेना के जुल्मों के खिलाफ खड़े होने की अपील की है।
“हम सिर्फ इन अपराधों की निंदा नहीं कर रहे, बल्कि संयुक्त राष्ट्र, भारत, यूरोप, और ब्रिटेन जैसे सभ्य देशों से अपील करते हैं कि वे पीओके और सिंध में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे नरसंहार और सरकार प्रायोजित जुल्म को रोकने के लिए तुरंत दखल दें।” – शफी बुरफत, प्रमुख, JSMM
भारत का दोटूक जवाब: “अपनी नाकामी छिपाने के लिए फेक वीडियो बना रहा पाकिस्तान”
पीओके में मानवाधिकारों के सरेआम हो रहे उल्लंघन पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा:
“पीओके में पुलिस की बर्बरता और लोगों के मारे जाने की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। पाकिस्तान हमेशा की तरह अपनी विफलताओं को छिपाने और दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए मनगढ़ंत कहानियां और फर्जी (Fake) वीडियो का पैटर्न चला रहा है। लेकिन वह अपने ही लोगों पर हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन को छिपा नहीं सकता।”
क्यों सुलग रहा है PoK?
दरअसल, यह पूरा विवाद पीओके की 12 आरक्षित विधानसभा सीटों को लेकर शुरू हुआ है। जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और कई स्थानीय संगठन पाकिस्तान की राजनीतिक साजिश के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं, जिसे दबाने के लिए पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस अंधाधुंध बल प्रयोग कर रही है।