पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ जहां ममता बनर्जी दिल्ली में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर रही थीं, ठीक उसी वक्त कोलकाता में सीआईडी (CID) की एक टीम उनके आवास पर दस्तक दे रही थी।
बताया जा रहा है कि सीआईडी की यह टीम ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) को एक मामले में नोटिस तामील कराने पहुंची थी।
दिल्ली में ‘विपक्षी एकजुटता’ और कोलकाता में ‘CID की दस्तक’
वर्तमान में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों ही ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की बैठक के सिलसिले में दिल्ली दौरे पर हैं। सोमवार को गठबंधन की बैठक के दौरान सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के गले मिलने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थीं। आज इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए ममता बनर्जी, सोनिया गांधी के आवास पर उनसे विशेष मुलाकात के लिए पहुंचीं।
लेकिन इसी दौरान, कोलकाता के 30 B हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित ममता बनर्जी के आवास पर फर्जी सिग्नेचर मामले की तफ्तीश के लिए सीआईडी की टीम पहुंच गई।
क्या है पूरा फर्जी सिग्नेचर (Fake Signature) मामला?
इस पूरे राजनीतिक ड्रामे की जड़ में एक कथित फर्जी हस्ताक्षर का मामला है। आइए इसे सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं:
- नेता प्रतिपक्ष का चुनाव: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी विधायक दल ने 6 मई को शोभनदेब चट्टोपाध्याय को सदन में नेता प्रतिपक्ष (LOP) नामित किया था।
- विधानसभा अध्यक्ष को पत्र: शोभनदेब को नेता विपक्ष बनाने के लिए 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा था।
- फर्जीवाड़े का आरोप: कुछ दिनों बाद टीएमसी के ही दो विधायकों—ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा—ने दावा किया कि उस पत्र पर किए गए हस्ताक्षर जाली हैं। उनका आरोप था कि कई विधायकों की सहमति के बिना उनके फर्जी सिग्नेचर किए गए हैं।
- FIR और जांच: इस शिकायत के बाद विधानसभा सचिवालय की ओर से एक एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई, जिसकी जांच अब पश्चिम बंगाल सीआईडी कर रही है।
सीआईडी (CID) जांच की अब तक की स्थिति
चूंकि विधायकों के हस्ताक्षर वाला वह पत्र अभिषेक बनर्जी ने ही विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा था, इसलिए सीआईडी की जांच का केंद्र अब अभिषेक बनर्जी ही हैं।
हाईकोर्ट पहुंचे अभिषेक बनर्जी: सीआईडी द्वारा बार-बार भेजे जा रहे समन और नोटिस के खिलाफ अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सीआईडी इस मामले में अब तक कई विधायकों से पूछताछ कर चुकी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अगर हस्ताक्षर फर्जी हैं, तो वो किसने किए।
टीएमसी का पलटवार: सुवेंदु अधिकारी पर साजिश का आरोप
इस पूरे घटनाक्रम पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे एक राजनीतिक साजिश करार दिया है:
- टारगेट करने का आरोप: टीएमसी का कहना है कि बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी जानबूझकर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को निशाना बना रहे हैं।
- विधायकों पर कार्रवाई: जिन दो विधायकों (ऋतब्रत और संदीपन) ने फर्जी हस्ताक्षर के आरोप लगाए हैं, उन्हें पार्टी पहले ही निष्कासित कर चुकी है।
- TMC में बड़ी टूट के संकेत: खबरों के मुताबिक, ऋतब्रत बनर्जी ने टीएमसी में बड़ी सेंधमारी की है। दावा किया जा रहा है कि 80 में से 60 विधायक ऋतब्रत के खेमे में चले गए हैं, वहीं 20 से अधिक सांसदों के भी अलग राह चुनने की अटकलें तेज हैं।