अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की राशि को लेकर एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह ने ट्रस्ट पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले के सामने आने के बाद से ही अयोध्या से लेकर लखनऊ और दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज है।
आइए जानते हैं कि इस पूरे विवाद में अब तक क्या-क्या हुआ है और दोनों पक्षों का इस पर क्या कहना है…
1. विपक्ष का तीखा हमला: अखिलेश यादव ने की कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग
समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर इस मामले को वैश्विक स्तर पर सनातनी समाज की आस्था से खिलवाड़ बताया।
- करोड़ों रुपये गायब होने का दावा: अखिलेश यादव ने कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे से करोड़ों की रकम गायब पाई गई है, जो मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है।
- अदालत से हस्तक्षेप की अपील: उन्होंने माननीय न्यायालय से इस गंभीर मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार की चुप्पी को भी संदिग्ध बताया है।
- ट्रस्ट की सफाई पर उठाए सवाल: ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय द्वारा जारी किए गए स्पष्टीकरण पर भी अखिलेश ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि 40 सेकंड का यह कमजोर स्पष्टीकरण खुद संदेह के घेरे में है। सच सामने लाने के लिए सभी ट्रस्टियों को एक साथ बैठाया जाए और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के साक्ष्यों से आंकड़ों का मिलान किया जाए।
उधर, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इस विवाद में कूदते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “चंदा चोरों गद्दी छोड़ो। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के नाम पर चंदा चोरी करने वालों को जेल भेजो।” उन्होंने चंपत राय को प्रभु श्रीराम की मूर्ति पर हाथ रखकर सौगंध खाने की चुनौती भी दे डाली।
2. हिरासत और रिकवरी की खबरें: क्या है दावों के पीछे का सच?
इस पूरे मामले में उस समय नाटकीय मोड़ आ गया जब सूत्रों के हवाले से यह खबर आई कि दानपात्र की गिनती के समय हेराफेरी के आरोप में राम मंदिर परिसर में देर रात तक जांच चली।
- सूत्रों का दावा: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की काउंटिंग टीम के 4 कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया था और उनके पास से यात्री सुविधा केंद्र में रिकवरी भी की गई थी। साथ ही ट्रस्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी को कार्यमुक्त किए जाने की चर्चा भी तेज रही।
- पुलिस अधिकारियों का खंडन: हालांकि, इन खबरों के वायरल होते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मोर्चा संभाला। पुलिस प्रशासन का दावा है कि किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया गया है और न ही किसी से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, मीडिया में चल रही हिरासत की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं; मंदिर परिसर में केवल एक ‘नॉर्मल ऑडिट’ (रूटीन जांच) की प्रक्रिया चल रही है, जो ट्रस्ट का आंतरिक और व्यक्तिगत विषय है।
3. राम मंदिर ट्रस्ट और बीजेपी का पलटवार: ‘जो गलत करेगा, रामलला खुद सजा देंगे’
चतरफा हमलों के बीच राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों और भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है:
- चंपत राय का वीडियो बयान: श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक वीडियो संदेश जारी कर विपक्ष के सभी आरोपों का खंडन किया और कहा कि ऐसी कोई बात (घोटाला) नहीं हुई है।
- पारदर्शिता का दावा: ट्रस्ट के सदस्य और निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास ने ट्रस्ट का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें किसी भी घोटाले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “हमें रामलला पर पूरा भरोसा है। हमारे ट्रस्टी ऐसा काम नहीं कर सकते। मंदिर की व्यवस्थाएं पूरी पारदर्शिता के साथ सुचारू रूप से चल रही हैं। अगर कोई गलत करेगा, तो भगवान राम स्वयं उसे सजा देंगे।”
- बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का बयान: यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इस मामले से सरकार को अलग करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से ट्रस्ट का विषय है, सरकार का नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अखिलेश यादव के हर राजनीतिक आरोप का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं।
कैसे होती है राम मंदिर के चढ़ावे की गिनती?
आपको बता दें कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर परिसर और पूरे दर्शन मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगभग 4 दर्जन (48) दानपात्र रखवाए हैं। इन पेटिकाओं में आने वाली नकदी को हर दिन इकट्ठा किया जाता है। इस धनराशि की सुरक्षित और पारदर्शी गिनती के लिए ट्रस्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को अधिकृत कर रखा है। इसी गिनती और ऑडिट के दौरान कथित गड़बड़ी की बातें सामने आई थीं।