NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद बैकफुट पर आई सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में है। 21 जून को होने वाले NEET री-एग्जाम को ‘लीक-प्रूफ’ बनाने के लिए एक ऐसा हाई-टेक प्लान तैयार किया गया है, जो किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। इस बार परीक्षा की सुरक्षा की कमान ज़मीन से लेकर आसमान तक कस दी गई है और एंट्री हुई है सीधे भारतीय वायुसेना “IAF” की।
पेपर लीक करने वाले सिंडिकेट का पत्ता साफ करने के लिए इस बार क्वेश्चन पेपर्स का ट्रांसपोर्टेशन सड़कों से नहीं, बल्कि आसमान के रास्ते होगा। भारतीय वायुसेना के कार्गो विमान और हेलीकॉप्टर देश के कोने-कोने में बने सेंटर्स तक पेपर पहुंचाएंगे।
इसके लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मिलकर एक फुल-प्रूफ ब्लूप्रिंट तैयार किया है। यानी रास्ते में पेपर से छेड़छाड़ की गुंजाइश अब बिल्कुल जीरो होगी।

21 जून तक नो इंटरनेट, नो फोन
लीक का सोर्स ब्लॉक करने के लिए परीक्षा से जुड़े स्टाफ और एक्सपर्ट्स को ‘कमांडर लेवल’ के आइसोलेशन में डाल दिया गया है। जो लोग पेपर सेट, मॉडरेशन या ट्रांसलेशन कर रहे हैं, उन्हें एक सीक्रेट हाई-सिक्योरिटी फैसिलिटी में ‘लॉक’ कर दिया गया है। मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट या स्मार्टवॉच उनके पास खुद का कोई डिजिटल डिवाइस नहीं है। 21 जून को एग्जाम खत्म होने तक ये लोग न तो इंटरनेट छू सकते हैं और न ही अपने परिवार से बात कर सकते हैं।
इस पूरे सीक्रेट मिशन की कमान खुद प्रधानमंत्री कार्यालय संभाल रहा है। पूरी प्रोसेस को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया है, जिससे किसी भी एक इंसान को पूरी चेन का पता ही न चल सके।
अफवाह फैलाने वालों पर ‘साइबर स्ट्राइक’
सिर्फ ग्राउंड पर ही नहीं, बल्कि इंटरनेट पर भी सरकार ने ‘नो-फ्लाई ज़ोन’ बना दिया है। टेलीग्राम और बाकी सोशल मीडिया ऐप्स पर परीक्षा से पहले ही ‘लीक’ के फर्जी दावे करने वाले गैंग्स पर सरकार की साइबर सेल 24 घंटे नज़र रख रही है। NTA ने साफ कर दिया है कि ऐसी अफवाहें फैलाने वालों को सीधे जेल भेजा जाएगा।