कर्नाटक में नई सरकार के गठन के बाद विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष की खबरें सामने आने लगी हैं। इसी बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उनका कहना है कि उन्हें वह विभाग नहीं मिला, जिसकी उम्मीद और आश्वासन दिया गया था। उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के प्रधान सचिव को एक सहयोगी के माध्यम से भेज दिया है।
शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में रेड्डी ने कहा कि उनका फैसला किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह उनके आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने साफ किया कि वे पार्टी के खिलाफ नहीं हैं और कांग्रेस के साथ बने रहेंगे।
पार्टी में बने रहेंगे, विधायक के तौर पर करेंगे काम
रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे विधानसभा सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभाते रहेंगे और पार्टी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बरकरार रहेगी।
विभाग को लेकर था विवाद
जानकारी के अनुसार, उन्हें बेंगलुरु से जुड़े शहरी विकास विभाग की जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद थी। रेड्डी का दावा है कि पहले उन्हें इस विभाग को देने का आश्वासन मिला था, लेकिन अंतिम समय में विभाग आवंटन में बदलाव हो गया।
इस्तीफा भेजने की प्रक्रिया
रेड्डी ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी तरह का टकराव नहीं चाहते, लेकिन अपने स्वाभिमान के साथ समझौता नहीं कर सकते।
राजनीतिक संकेत क्या हैं?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटनाक्रम कर्नाटक कांग्रेस के भीतर असंतोष के संकेत दे रहा है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अब तक इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।