Sign In
  • My Bookmarks
Indian Press House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Reading: ‘दिल्ली’ की चाहत में उजड़ गया अपना ही घर: ममता से केसीआर तक, ‘थर्ड फ्रंट’ के चक्कर में कैसे ढह गए क्षेत्रीय दिग्गजों के किले?
Share
Indian Press HouseIndian Press House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
Indian Press House > Blog > फीचर > ‘दिल्ली’ की चाहत में उजड़ गया अपना ही घर: ममता से केसीआर तक, ‘थर्ड फ्रंट’ के चक्कर में कैसे ढह गए क्षेत्रीय दिग्गजों के किले?
फीचर

‘दिल्ली’ की चाहत में उजड़ गया अपना ही घर: ममता से केसीआर तक, ‘थर्ड फ्रंट’ के चक्कर में कैसे ढह गए क्षेत्रीय दिग्गजों के किले?

news desk
Last updated: May 6, 2026 4:38 pm
news desk
Share
SHARE

नई दिल्ली/कोलकाता। भारतीय राजनीति के कैनवास पर ‘तीसरा मोर्चा’ (Third Front) एक ऐसी मृगतृष्णा साबित हुआ है, जिसके पीछे भागते-भागते कई क्षेत्रीय क्षत्रपों ने अपनी जमीनी पकड़ खो दी। ताजा उदाहरण पश्चिम बंगाल से आ रहा है, जिसे कभी ममता बनर्जी का अभेद्य दुर्ग माना जाता था, लेकिन वहां बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है।

Contents
ममता बनर्जी: ‘खेला होबे’ से अपनी जमीन खोने तक का सफरवो दिग्गज नेता जिनकी ‘राष्ट्रीय उड़ान’ ने उन्हें घर में गिरायाकेसीआर और नायडू की ‘हताश’ दौड़शरद पवार: राजनीति के ‘पितामह’ की उलझी बिसातक्यों ‘गेम ओवर’ कर देता है थर्ड फ्रंट?

ममता बनर्जी: ‘खेला होबे’ से अपनी जमीन खोने तक का सफर

2021 की प्रचंड जीत के बाद ममता बनर्जी ने खुद को पीएम मोदी के विकल्प के रूप में पेश करने के लिए ‘विस्तार नीति’ अपनाई। उन्होंने गोवा, त्रिपुरा और मेघालय में टीएमसी का झंडा बुलंद करने की कोशिश की, लेकिन इस ‘राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा’ की भारी कीमत उन्हें अपने ही राज्य में चुकानी पड़ी। टीएमसी जो कभी 200+ पर थी, आज 80 सीटों के नीचे सिमट गई है।

वो दिग्गज नेता जिनकी ‘राष्ट्रीय उड़ान’ ने उन्हें घर में गिराया

नेताराज्यमहत्वाकांक्षा का परिणाम
के. चंद्रशेखर राव (KCR)तेलंगानाTRS को BRS बनाया, राष्ट्रीय दौरे किए; 2023 में कांग्रेस से सत्ता हार गए।
चंद्रबाबू नायडूआंध्र प्रदेश2019 में विपक्षी एकता के सूत्रधार बने; राज्य में अपनी सत्ता और जमीन दोनों खो दी।
शरद पवारमहाराष्ट्रविपक्षी चेहरा बनने की कोशिश में पार्टी (NCP) दोफाड़ हुई; भतीजे ने पार्टी और सिंबल छीना।
अरविंद केजरीवालदिल्ली/पंजाबगुजरात और गोवा विस्तार के चक्कर में दिल्ली के किले में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

केसीआर और नायडू की ‘हताश’ दौड़

तेलंगाना के 10 साल मुख्यमंत्री रहे केसीआर ने गैर-कांग्रेसी ‘थर्ड फ्रंट’ के लिए पटना से चेन्नई तक के चक्कर लगाए। उन्होंने अपनी पार्टी का नाम तक बदल दिया, लेकिन नतीजा यह रहा कि 2023 में कांग्रेस ने उन्हें उन्हीं के घर में पटखनी दे दी। यही हाल 2019 में चंद्रबाबू नायडू का हुआ था, जो बीजेपी से नाता तोड़कर विपक्षी एकता के ‘फेसिलिगेटर’ बनने निकले थे, लेकिन खुद अपनी सत्ता नहीं बचा पाए।

शरद पवार: राजनीति के ‘पितामह’ की उलझी बिसात

दशकों तक क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने वाले शरद पवार की राजनीति का अंत काफी दर्दनाक रहा। राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी चेहरा बनने की कोशिश के बीच उनकी अपनी ही पार्टी दो हिस्सों में बंट गई। आज वह अपनी उम्र के आखिरी पड़ाव पर पार्टी के नाम और निशान को बचाने की कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

क्यों ‘गेम ओवर’ कर देता है थर्ड फ्रंट?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, तीसरे मोर्चे की असफलता के 3 मुख्य कारण हैं:

  1. पीएम पद की चाहत: कॉमन मिनिमम प्रोग्राम से ज्यादा नेताओं में पीएम बनने की होड़ रहती है। ममता, केजरीवाल और नीतीश एक-दूसरे का नेतृत्व स्वीकार नहीं करते।
  2. घरेलू मोर्चे पर लापरवाही: जब क्षेत्रीय नेता दिल्ली में ज्यादा समय बिताने लगते हैं, तो उनके अपने राज्य का कैडर और जनता उनसे दूर होने लगती है।
  3. मजबूत ध्रुवीकरण: 90 के दशक के विपरीत, आज बीजेपी एक बेहद अनुशासित और मजबूत कैडर वाली पार्टी है। राजनीति अब ‘त्रिकोणीय’ के बजाय दो ध्रुवों (NDA बनाम विपक्षी गठबंधन) की ओर बढ़ रही है।

तेलंगाना में केसीआर की हार, पवार की पार्टी का टूटना और बंगाल में ममता का कमजोर होना यह साबित करता है कि क्षेत्रीय क्षत्रपों के लिए ‘दिल्ली’ अभी बहुत दूर है। उनके लिए सबसे बड़ा सबक यही है कि राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं के फेर में अपना घर दांव पर न लगाएं।

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: 'थर्ड फ्रंट', #IndianPolitics, #KCR, #MamataBanerjee, #SharadPawar, #ThirdFront, BJPWestBengal, PoliticalAnalysis Election2026
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article सोना-चांदी के दामों में तूफानी तेजी! वैश्विक तनाव और डॉलर कमजोरी ने बाजार में मचाई हलचल
Next Article 1800 कैरेट हीरे और ‘स्टील मैंगो’ के साथ ईशा अंबानी ने MET GALA में मचाई धूम! गौरव गुप्ता की गोल्ड साड़ी में दिखाई भारतीय विरासत

फीचर

View More

इंजीनियर की नौकरी छोड़ी, बिना कोचिंग UPSC में रचा इतिहास; IAS सुभंकर बाला की प्रेरणादायक सफलता कहानी

नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल किया जाता…

By vineet verma 4 Min Read

ट्रेन लेट है या सुबह की है? जानिए क्या रातभर रेलवे स्टेशन पर रुक सकते हैं यात्री, क्या कहते हैं भारतीय रेलवे के नियम

नई दिल्ली: कई बार ट्रेन घंटों देरी से चलती है या फिर…

3 Min Read

कश्मीर के छोटे से गांव से टीम इंडिया तक… आकिब नबी की कहानी, जिसने पूरे कश्मीर का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया

भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाना हर युवा खिलाड़ी का सपना होता…

6 Min Read

विचार

View More

क्या कभी सोचा है कि आखिर कैसे दक्षिण से उत्तर तक पूरे देश में छा जाते हैं बादल और शुरू हो जाती है झमाझम बारिश?

नई दिल्ली: देश में मानसून की दस्तक हो चुकी है।…

July 9, 2026

‘एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा नहीं लौटेगा’… आखिर ईरान ने अमेरिका को क्यों दी खुली चेतावनी? जानिए कैसे बढ़ा नया सैन्य तनाव

तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और…

July 9, 2026

अमीर पति बनेगा सहारा या मुसीबत? डेटिंग ऐप CEO की सलाह से छिड़ी बहस, महिलाओं से कहा- ‘कमाई का अंतर ज्यादा हो तो सोचिए’

नई दिल्ली: शादी और रिश्तों को…

June 9, 2026

मानसून की दस्तक में फिर देरी, आखिर कब पहुंचेगा केरल? जानिए क्यों बार-बार बदल रही है IMD की तारीख

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों…

June 4, 2026

रिंकू का ओवर और राइवलरी का बदलता अर्थ: क्या भारत–पाक मुकाबले से गायब हो गई वो अनिश्चितता?

रिंकू का ओवर और राइवलरी का…

February 16, 2026

You Might Also Like

Latest Newsफीचर

इंजीनियर की नौकरी छोड़ी, बिना कोचिंग UPSC में रचा इतिहास; IAS सुभंकर बाला की प्रेरणादायक सफलता कहानी

नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल किया जाता…

4 Min Read
Latest Newsफीचर

ट्रेन लेट है या सुबह की है? जानिए क्या रातभर रेलवे स्टेशन पर रुक सकते हैं यात्री, क्या कहते हैं भारतीय रेलवे के नियम

नई दिल्ली: कई बार ट्रेन घंटों देरी से चलती है या फिर सुबह तड़के रवाना होती है। ऐसे में यात्री…

3 Min Read
Trending Newsफीचर

कश्मीर के छोटे से गांव से टीम इंडिया तक… आकिब नबी की कहानी, जिसने पूरे कश्मीर का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया

भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाना हर युवा खिलाड़ी का सपना होता है, लेकिन जब यह सपना जम्मू-कश्मीर के एक…

6 Min Read
Trending Newsफीचर

रूस की रिसर्च में बड़ा दावा-194 साल तक जी सकता है इंसान, क्या ‘अमरता’ की दिशा में बढ़ रही दुनिया

क्या इंसान कभी अमर हो सकता है? यह सवाल सदियों से विज्ञान और मानव जिज्ञासा का केंद्र रहा है। अब…

3 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?