प्रयागराज/लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के टिकैत गुट को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और युवा प्रदेश अध्यक्ष अनुज सिंह पर गंभीर आरोप लग रहे हैं कि उनके संरक्षण में पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के आरोपियों और माफिया संगठन का हिस्सा बन रहे हैं।
सोशल मीडिया और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हाल ही में जिले के 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था, उन्हें यूनियन की रैलियों में प्रमुखता से देखा गया है।

BKU के पदों पर काबिज ‘दागी’ चेहरों की सूची
संगठन में शामिल कुछ विवादित नामों ने पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ा दी है:
- हरीशचंद पासी व उदय यादव: 50-50 हजार के इनामीआरोपी, जो हाल ही में संगठन के साथ जुड़कर नारेबाजी करते दिखे।
- नियाज़ अहमद: उमेश पाल हत्याकांड का आरोपी, जिसे बीकेयू का महानगर अध्यक्ष बनाया गया था (वर्तमान में जेल में)।
- मोहम्मद शाकिर: एयरपोर्ट थाने का हिस्ट्रीशीटर और माफिया अतीक अहमद के शार्प शूटर गुलफुल प्रधान का भतीजा, जिसे जिला मंडल प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।
- चंद्रसेन सिंह: यमुनापार अध्यक्ष, जिस पर दलित महिला की हत्या के प्रयास समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं।
- देवेंद्र तिवारी उर्फ रानू तिवारी: नैनी थाने का हिस्ट्रीशीटर, जो वर्तमान में जिला महामंत्री के पद पर है।
- वदूद अहमद: IS-227 गैंग का सक्रिय सदस्य और हिस्ट्रीशीटर।
- अजीत विक्रम पाण्डेय: प्रदेश उपाध्यक्ष, जिन पर भू-माफिया होने के आरोप हैं।
किसान यूनियन या ‘माफिया यूनियन’?
युवा प्रदेश अध्यक्ष अनुज सिंह की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आलोचकों का कहना है कि किसानों की समस्याओं के लिए बना यह मंच अब अपराधियों के लिए ‘कवच’ बनता जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या राकेश टिकैत के नेतृत्व वाला यह संगठन अपनी मूल विचारधारा से भटक कर माफियाओं को राजनीतिक और सामाजिक संरक्षण दे रहा है?