वाशिंगटन/तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस भीषण सैन्य संघर्ष और कूटनीतिक रस्साकशी की स्थिति वाकई बेहद नाजुक बनी हुई है।
ताज़ा रिपोर्टों (28 अप्रैल 2026) के अनुसार, दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं, जिससे किसी स्थायी समाधान तक पहुँचना मुश्किल हो रहा है।
मध्य पूर्व (Middle East) में जारी सैन्य गतिरोध को तोड़ने के लिए ईरान ने एक नया कूटनीतिक कार्ड खेला है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ओमान और पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक शांति प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस प्रस्ताव को लेकर खासे आशंकित नजर आ रहे हैं।
ईरान का प्रस्ताव: क्या हैं 3 मुख्य शर्तें?
ईरान ने संघर्ष को खत्म करने और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को फिर से खोलने के लिए तीन बड़ी शर्तें रखी हैं:
- नाकाबंदी का अंत: अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगी आर्थिक और समुद्री नाकाबंदी को पूरी तरह हटा दे।
- युद्ध विराम: मिडिल ईस्ट में जारी सभी सैन्य कार्रवाइयों और जंग को तुरंत खत्म किया जाए।
- परमाणु मुद्दा: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को फिलहाल टाल दिया जाए और इसे बातचीत के अगले चरण (Future Phase) के लिए रखा जाए।
ट्रंप की ‘नो कॉम्प्रोमाइज’ पॉलिसी: परमाणु मुद्दा ही सबसे बड़ी रुकावट
‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी नेशनल सिक्योरिटी टीम इस प्रस्ताव को शक की निगाह से देख रही है। ट्रंप की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह परमाणु कार्यक्रम पर ईरान की चुप्पी है।
ट्रंप का रुख: डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दोहरा चुके हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार कभी नहीं होने चाहिए। इस युद्ध का एक मुख्य उद्देश्य ही ईरान की परमाणु क्षमता को नष्ट करना था।
मार्को रुबियो की चेतावनी: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में इस प्रस्ताव को लगभग खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा, “हम उन्हें परमाणु मुद्दे से बचने नहीं दे सकते। कोई भी समझौता तभी होगा जब वह उन्हें परमाणु हथियार बनाने से पूरी तरह रोके।”
व्हाइट हाउस का कड़ा संदेश: “मीडिया के जरिए नहीं होगी बात”
भले ही ट्रंप ने पहले ईरान को फोन पर बातचीत का विकल्प दिया था, लेकिन अब व्हाइट हाउस के सुर सख्त हैं। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने आधिकारिक बयान में कहा:
“अमेरिका मीडिया के जरिए सौदेबाजी नहीं करेगा। हमने अपनी शर्तें साफ कर दी हैं। राष्ट्रपति ट्रंप केवल वही समझौता करेंगे जो अमेरिकी नागरिकों और वैश्विक सुरक्षा के हित में हो।”
क्या होगा अगला कदम?
वर्तमान में ईरान के यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) प्रयासों और युद्ध की स्थिति पर चर्चा जारी है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर ठोस गारंटी नहीं देता, तब तक ट्रंप प्रशासन की ओर से किसी भी राहत की उम्मीद कम है।
ईरान का ‘पीस प्लान’ या कूटनीतिक चाल?
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने के बदले नाकाबंदी हटाने की शर्त रखी है, लेकिन ट्रंप को यह मंजूर नहीं। जानिए क्यों अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान को परमाणु मुद्दे से भागने नहीं देंगे। क्या बातचीत से सुलझेगी जंग या बढ़ेगा तनाव?