नासिक। महाराष्ट्र की आध्यात्मिक नगरी नासिक एक बार फिर फर्जी बाबाओं के कारनामों से दहल गई है। अभी कुख्यात अशोक खरात का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि लासलगांव क्षेत्र से एक और कथित बाबा महेश गिरी की घिनौनी करतूत सामने आई है। खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले इस शख्स पर महिलाओं के यौन शोषण और अंधविश्वास फैलाने के गंभीर आरोप लगे हैं।
डर का जाल और फिर दरिंदगी
पुलिस जांच में आरोपी के काम करने का खौफनाक तरीका सामने आया है। महेश गिरी पहले संकटग्रस्त परिवारों को निशाना बनाता था। वह पीड़ितों के मन में यह डर बैठा देता था कि उन पर कोई ‘दैवीय प्रकोप’ या भारी संकट आने वाला है। इसी डर का फायदा उठाकर वह महिलाओं को पवित्र तालाब में स्नान और ‘विशेष अनुष्ठान’ के बहाने एकांत में ले जाता और फिर उनका शारीरिक शोषण करता था।
ANIS की सतर्कता से सलाखों के पीछे पहुँचा आरोपी
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक बहादुर पीड़िता ने अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (ANIS) से संपर्क किया। समिति के पदाधिकारियों की मदद से मामला पुलिस तक पहुँचा। नासिक ग्रामीण पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर लासलगांव थाने में आरोपी के खिलाफबलात्कार (Rape) और महाराष्ट्र जादू-टोना विरोधी कानून (Anti-Superstition Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
क्या हैं इस मामले के बड़े सवाल?
पुलिस को अंदेशा है कि महेश गिरी ने इसी तरह कई अन्य महिलाओं को भी अपनी हवस का शिकार बनाया होगा। आस्था की आड़ में चल रहे इस खेल ने समाज के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
- मानसिक नियंत्रण: कैसे ये फर्जी बाबा लोगों को मानसिक रूप से गुलाम बना लेते हैं?
- डर की राजनीति: धर्म के नाम पर डर दिखाकर कब तक मासूमों का शिकार किया जाता रहेगा?
- जागरूकता की कमी: क्या समाज आज भी आस्था और अंधविश्वास के बीच का फर्क भूल चुका है?
प्रशासन की अपील
पुलिस प्रशासन और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति के झांसे में न आएं जो संकट दूर करने के नाम पर अनैतिक मांगें करता हो। यदि कोई और भी इस बाबा का शिकार हुआ है, तो वह बिना डरे पुलिस के सामने आए।