नई दिल्ली/इस्लामाबाद। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाएं तेज हो गई हैं। ताजा कूटनीतिक गतिविधियों के तहत अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance के इस्लामाबाद दौरे की चर्चा है, जहां संभावित शांति वार्ता को लेकर अहम बैठक हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, वॉशिंगटन इस बात का इंतजार कर रहा था कि तेहरान वार्ता के लिए आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजेगा या नहीं। ईरान के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद सामने आए थे, जहां एक धड़ा अमेरिकी प्रतिबंध हटने से पहले बातचीत के खिलाफ था।
मध्यस्थ देशों की सक्रिय भूमिका
क्षेत्रीय स्तर पर Pakistan, Egypt और Turkey जैसे देशों ने दोनों पक्षों को बातचीत के लिए राजी करने की कोशिशें तेज की हैं। इसी कड़ी में ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से वार्ता के लिए संकेत मिलने के बाद बातचीत का रास्ता खुलता नजर आ रहा है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी हो सकता है शामिल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संभावित दौरे में Donald Trump के करीबी सहयोगी स्टीव विटकॉफ और Jared Kushner भी शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि बुधवार को दोनों देशों के बीच अहम बातचीत हो सकती है।
सीजफायर की समयसीमा बनी बड़ी चिंता
गौरतलब है कि 8 अप्रैल से लागू अस्थायी युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। Donald Trump पहले ही संकेत दे चुके हैं कि यदि कोई ठोस समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है।
विरोधाभासी संकेतों से बढ़ी अनिश्चितता
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी नेतृत्व युद्धविराम बढ़ाने के पक्ष में नहीं है, जबकि दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि बातचीत में प्रगति होने पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल ईरान ने आधिकारिक तौर पर अपनी भागीदारी की पुष्टि नहीं की है, लेकिन कूटनीतिक चैनलों के जरिए सकारात्मक संकेत जरूर दिए हैं।