लखनऊ, 13 मार्च 2026: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी शुक्रवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल हुए। बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम की जयंती (15 मार्च) से ठीक पहले आयोजित इस कार्यक्रम को कांग्रेस ने “सामाजिक परिवर्तन दिवस” और “संविधान सम्मेलन” के रूप में मनाया। दोपहर करीब 3:30 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में दलित नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों के साथ हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने कांशीराम के बहुजन आंदोलन में योगदान को याद किया, लेकिन साथ ही कांग्रेस की कमियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में कमियां थीं, इसलिए कांशीराम का आंदोलन सफल हुआ। राहुल गांधी ने कहा, “अगर कांग्रेस अपना काम ठीक से करती तो कांशीराम को अलग से आंदोलन खड़ा करने की जरूरत नहीं पड़ती।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर पंडित जवाहरलाल नेहरू आज जिंदा होते तो कांशीराम कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री होते।
राहुल गांधी ने सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि आज किसी भी बड़े अस्पताल में दलित, पिछड़े या आदिवासी डॉक्टर आसानी से नहीं मिलते, जबकि संविधान “जितनी आबादी उतनी भागीदारी” की बात करता है। उन्होंने मनरेगा का उदाहरण देते हुए कहा कि उसकी सूची में करीब 85% लोग पिछड़े, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों से आते हैं, लेकिन सत्ता के केंद्रों में उनकी भागीदारी उतनी नहीं है।
अपने भाषण में राहुल गांधी ने डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा गांधी, कांशीराम और वीर सावरकर का जिक्र करते हुए कहा कि आंबेडकर, गांधी और कांशीराम ने अपने सिद्धांतों पर कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों पर भी निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि देश की एनर्जी सिक्योरिटी के साथ समझौता किया गया है और अब अमेरिका यह तय कर रहा है कि भारत तेल कहां से खरीदेगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब यह तय कर चुकी है कि देश में जातिगत जनगणना कराई जाएगी और पिछड़े, दलित व वंचित समुदायों को सत्ता के केंद्रों में उचित स्थान दिलाया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह कार्यक्रम कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसके जरिए पार्टी उत्तर प्रदेश में दलित और पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को मजबूत करने का संदेश देने की कोशिश कर रही है।
इससे पहले शुक्रवार को संसद में भी राहुल गांधी ने ऊर्जा संकट, एलपीजी की संभावित कमी और रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका के दबाव जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार की आलोचना की, जिससे लोकसभा में हंगामा भी देखने को मिला। हालांकि लखनऊ का यह कार्यक्रम पूरे दिन राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना रहा।
कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि यह आयोजन सामाजिक न्याय के एजेंडे को आगे बढ़ाने और आने वाले चुनावों से पहले मजबूत राजनीतिक संदेश देने की दिशा में एक अहम कदम है।