देश के करोड़ों मिडिल क्लास और गरीब बैंक खाताधारकों के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद राहत भरी जानकारी शेयर की है। वित्त मंत्री ने संसद में स्पष्ट किया है कि भारत के लगभग 72.13 करोड़ बैंक खातों पर मिनिमम बैलेंस न रखने की स्थिति में भी अब कोई जुर्माना लिया जाएगा।
किन ग्राहकों को मिलेगा इसका सीधा फायदा?
सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ उन लोगों को मिलेगा जो बैंकिंग सेवाओं से डरते थे कि कहीं उनका पैसा कट न जाए। वित्त मंत्री के अनुसार, निम्नलिखित खातों पर जीरो बैलेंस की सुविधा है:
1- प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खुले सभी खाते।
2- बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट्स, जो कम आय वर्ग के लिए बनाए गए हैं।
3- देश में ऐसे खातों की कुल संख्या 72 करोड़ के पार है, जहाँ बैलेंस शून्य होने पर भी बैंक 1 रुपए भी पेनल्टी नहीं काट सकते।
संसद में पेश किए गए आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। पिछले तीन वर्षों में बैंकों ने मिनिमम बैलेंस न रखने पर ग्राहकों से 19,000 करोड़ रुपए से अधिक की भारी वसूली की है। इसमें प्राइवेट बैंकों (HDFC, ICICI, Axis) ने 11,000 करोड़ रुपए और सरकारी बैंकों (PNB, केनरा, BOB) ने 8,093 करोड़ रुपए का जुर्माना वसूला है।
RBI के कड़े नियम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
पहले सूचना देना अनिवार्य: अगर बैलेंस तय सीमा से नीचे जाता है, तो बैंक को SMS या ईमेल भेजकर ग्राहक को अलर्ट करना होगा।
सुधार का समय: जुर्माना लगाने से पहले बैंक को ग्राहक को एक निश्चित समय देना होगा ताकि वह खाते में पैसे डाल सके।
खाता ‘माइनस’ में नहीं जाएगा: बैंक पेनल्टी के नाम पर खाते के बैलेंस को कभी भी नेगेटिव नहीं कर सकते।
आम आदमी के लिए इसके मायने
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस कदम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग के प्रति विश्वास बढ़ेगा। “वित्तीय समावेशन” के इस दौर में, ये सुनिश्चित करना जरूरी है कि बैंकिंग सेवाएं बोझ न बनें।