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अमेरिका की ना पर भारत ने कहा हां…जब वेनेजुएला डील पर भारत की रणनीति से हैरान रह गया था USA!

news desk
Last updated: January 6, 2026 6:04 pm
news desk
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अमेरिका ने वेनेजुएला पर अपना वर्चस्व कायम करने के लिए अब खुलकर तेल की राजनीति खेलनी शुरू कर दी है। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में शामिल वेनेजुएला लंबे समय से अमेरिकी रणनीति के निशाने पर रहा है। इसी कड़ी में अमेरिका ने बड़ा कदम उठाते हुए वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमेरिकी फेडरल कोर्ट में पेश किया।

दरअसल, अमेरिका की नजर वर्षों से वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर टिकी रही है। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुनियोजित रणनीति के तहत पूरे मिशन को अंजाम दिए जाने का दावा किया जा रहा है। हालात यहीं नहीं रुके अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला की राजधानी कराकस पर की गई भारी बमबारी ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं, जिससे पूरे लैटिन अमेरिका में तनाव चरम पर पहुंच गया है।

इस बीच यूएस फेडरल कोर्ट में पेश किए गए राष्ट्रपति मादुरो ने अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को “नॉट गिल्टी” बताया। दूसरी ओर, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार मादुरो सरकार पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव राजनीतिक कम और तेल पर नियंत्रण की लड़ाई अधिक है।

वेनेजुएला के पास कच्चे तेल का अपार भंडार है और यही वजह है कि अमेरिका की दिलचस्पी वहां कभी कम नहीं हुई। इसी मुद्दे को लेकर दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण बने रहे हैं। हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच एक अहम तथ्य यह भी है कि भारत और वेनेजुएला के संबंध हमेशा से अपेक्षाकृत सौहार्दपूर्ण रहे हैं। ऊर्जा सहयोग और कूटनीतिक संतुलन के चलते भारत ने वेनेजुएला के साथ अपने रिश्तों को बनाए रखा है, जो मौजूदा वैश्विक भू-राजनीति में भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को भी दर्शाता है।

उस समय अमेरिका ने खुलकर भारत का विरोध किया था, लेकिन भारत ने उसकी एक नहीं सुनी और वही कदम उठाया जो राष्ट्रीय हित में था। इसी क्रम में भारत ने वेनेज़ुएला के साथ डील को अंतिम रूप दिया था।

साल 2005 में तत्कालीन वेनेजुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज की भारत यात्रा ने भारत-वेनेजुएला संबंधों को नई दिशा और ऊंचाई दी। इस ऐतिहासिक दौरे के दौरान हाइड्रोकार्बन, जैव प्रौद्योगिकी, रेलवे और व्यापार जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण समझौते हुए। इस यात्रा ने खास तौर पर तेल कूटनीति को मजबूती दी और भारत को वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र में प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर मिला।

हाइड्रोकार्बन क्षेत्र दोनों देशों के सहयोग का केंद्र रहा। ह्यूगो शावेज ने भारत को कच्चे तेल की दीर्घकालिक आपूर्ति का भरोसा दिया, वहीं ओएनजीसी विदेश (ONGC Videsh) को वेनेजुएला के ओरिनोको तेल क्षेत्र में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का प्रस्ताव भी रखा गया। इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज़ से एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि माना गया।

द्विपक्षीय रिश्तों को संस्थागत रूप देने के लिए भारत और वेनेजुएला के बीच संयुक्त आयोग (Joint Commission) की स्थापना पर सहमति बनी, जिससे राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाया जा सके। इसके अलावा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

रेलवे और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग ने विकासशील देशों के बीच तकनीकी साझेदारी को मजबूती दी। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देशों ने आपसी समन्वय बढ़ाने का फैसला किया। NAM, G-15, संयुक्त राष्ट्र और WTO जैसे मंचों पर मिलकर काम करने के साथ-साथ वेनेजुएला ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।

ह्यूगो शावेज ने दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देने की वकालत करते हुए साउथ बैंक और साउथ टीवी चैनल जैसे प्रस्तावों पर भी चर्चा की। सामाजिक स्तर पर जुड़ाव दिखाते हुए उन्होंने कोलकाता के एक स्कूल के लिए दान और भारत की मिड-डे मील योजना को बेहतर बनाने में सहयोग का वादा किया।

साल 2005 में मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में भारत-वेनेजुएला संबंधों को नई ऊंचाई मिली और इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत होते चले गए। ऊर्जा, कूटनीति और विकास सहयोग के जरिए यह साझेदारी आज भी भारत की बहुआयामी विदेश नीति का एक अहम उदाहरण मानी जाती है।

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TAGGED: India Energy Cooperation, India foreign policy, India Geopolitics, India Strategy, India Venezuela Deal, India-US Relations, US vs India, USA Reaction Venezuela, Venezuela Oil Deal, Venezuela Oil Partnership
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