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तपने वाले हैं 9 दिन: 50 डिग्री टॉर्चर के साथ आ रहा ‘नौतपा’, जानें विज्ञान और ज्योतिष का ये अनोखा कनेक्शन!

news desk
Last updated: May 23, 2026 11:23 am
news desk
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भारत में मई का महीना आते ही सूरज के तेवर तीखे हो जाते हैं, लेकिन इस तपती गर्मी के बीच एक ऐसा समय आता है जिसे साल का ‘सबसे गर्म दौर’ कहा जाता है। इसे पारंपरिक भाषा में ‘नौतपा’ (Nautapa) कहते हैं। इस दौरान उत्तर और मध्य भारत के कई राज्य भीषण लू (Heatwave) की चपेट में आ जाते हैं।

Contents
रोहिणी नक्षत्र और सूर्य का मेल: क्यों प्रचंड होती है गर्मी?विज्ञान की नजर में ‘नौतपा’: क्यों उबलने लगता है उत्तर भारत?नौतपा की मुख्य पहचान और इसके खतरेबदलते दौर में नौतपा: पारंपरिक मान्यता बनाम क्लाइमेट चेंज

आमतौर पर हर साल नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक चलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर इन 9 दिनों में ऐसा क्या होता है कि दिन के साथ-साथ रातें भी भट्टी की तरह तपने लगती हैं? आइए इसके पीछे के ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारणों को समझते हैं।

रोहिणी नक्षत्र और सूर्य का मेल: क्यों प्रचंड होती है गर्मी?

पारंपरिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य अपनी वार्षिक यात्रा के दौरान 27 अलग-अलग नक्षत्रों से होकर गुजरता है। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो उसके शुरुआती 9 दिनों को ‘नौतपा’ कहा जाता है।

क्या है इसके पीछे की मान्यता? रोहिणी नक्षत्र को पारंपरिक रूप से शीतलता, नमी और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है, जबकि सूर्य साक्षात अग्नि और ऊष्मा का रूप हैं। ज्योतिषीय गणना बताती है कि जब सूर्य रोहिणी के शुरुआती 9 अंशों (Degrees) पर होता है, तो उसकी तपिश अपने चरम पर पहुंच जाती है। शीतलता और प्रचंड अग्नि के इस टकराव के कारण धरती का तापमान अचानक तेजी से बढ़ जाता है।

विज्ञान की नजर में ‘नौतपा’: क्यों उबलने लगता है उत्तर भारत?

जहां ज्योतिष इसे नक्षत्रों का खेल मानता है, वहीं विज्ञान के पास इसके लिए एक बेहद सटीक और भौगोलिक तर्क है।

  • सीधी किरणें (Direct Solar Radiation): मई के अंत में सूर्य की स्थिति ऐसी होती है कि इसकी किरणें उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) के मैदानी हिस्सों पर बिल्कुल सीधी यानी लंबवत पड़ती हैं।
  • हीट ट्रैपिंग (Heat Trapping): सौर विकिरण (Solar Radiation) बढ़ने के कारण कंक्रीट के जंगल बन चुके शहर और सूखी जमीन बहुत ज्यादा गर्मी सोख लेती है।
  • दिन-रात का टॉर्चर: गर्मी के आम दिनों में शाम होते ही तापमान में थोड़ी गिरावट आती है, लेकिन नौतपा के दौरान जमीन इतनी ज्यादा गर्म हो जाती है कि सूरज डूबने के बाद भी वातावरण से गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। यही कारण है कि इस दौरान रातें भी बेहद बेचैन करने वाली होती हैं।

नौतपा की मुख्य पहचान और इसके खतरे

अगर आप सोच रहे हैं कि नौतपा की पहचान कैसे होती है, तो इसके लक्षण बेहद साफ और खतरनाक होते हैं:

  • सुबह से ही लू का तांडव: आमतौर पर सुबह 9:00 से 10:00 बजे के बीच ही हवाएं सूखी और झुलसाने वाली हो जाती हैं।
  • 50 डिग्री के पार पारा: दोपहर के समय मैदानी इलाकों का तापमान अक्सर 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है और कई गंभीर मामलों में यह 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच जाता है।
  • लगातार बनी रहने वाली गर्मी: शाम या रात के समय भी तापमान में कोई खास कमी न आना ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है।

बदलते दौर में नौतपा: पारंपरिक मान्यता बनाम क्लाइमेट चेंज

आज के समय में जब ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण अप्रैल और मार्च के महीने में ही रिकॉर्डतोड़ गर्मी देखने को मिल रही है, ऐसे में नौतपा की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अल-नीनो के प्रभाव और कंक्रीट के बढ़ते जाल के कारण नौतपा के ये 9 दिन अब पहले से कहीं ज्यादा जानलेवा साबित हो रहे हैं।

यही कारण है कि इस दौरान डॉक्टरों द्वारा दोपहर 12 से 3 बजे के बीच घरों से बाहर न निकलने, शरीर में पानी की कमी न होने देने और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है।

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