नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पुलिस की कार्रवाई ने करोड़ों रुपये के कथित काले धन का बड़ा खुलासा कर दिया है। एक सरकारी बस ड्राइवर के साधारण से घर से 28 करोड़ 50 लाख रुपये नकद और 15 किलो सोना बरामद हुआ है। नोटों की गिनती पूरी करने में पूरी रात लग गई और इस दौरान पांच नोट गिनने वाली मशीनें भी खराब हो गईं। इस मामले में पुलिस अब पैसे के स्रोत, कारोबारी तुलु मंडल और उसके कथित राजनीतिक संबंधों की जांच में जुट गई है।
एक चोर से मिला सुराग, फिर खुला करोड़ों के कैश का राज
पुलिस को करोड़ों रुपये छिपाए जाने की जानकारी एक चोर से पूछताछ के दौरान मिली। इसके बाद सरकारी बस ड्राइवर मोहम्मद मिनार मंडल के घर पर छापेमारी की गई। शुरुआती तौर पर साधारण मकान देखकर पुलिस को भी सूचना पर संदेह हुआ, लेकिन घर के भीतर रखी लोहे की अलमारियां खुलते ही पूरा मामला सामने आ गया।
अलमारियों में नोटों से भरे 25 बैग रखे थे। बैंक से मंगाई गई मशीनों के जरिए रातभर नोटों की गिनती की गई, जिसमें अब तक 28 करोड़ 50 लाख रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं।
अलमारी के पीछे मिला 15 किलो सोना
कैश बरामद होने के बाद पुलिस ने दोबारा तलाशी ली तो अलमारी के पीछे रखे एक पुराने थैले से सोने की ईंटें और बिस्किट मिले। जांच में 1-1 किलो के 14 गोल्ड बार और 100-100 ग्राम के 10 गोल्ड बिस्किट बरामद हुए। कुल 15 किलो 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 21 करोड़ 50 लाख रुपये आंकी गई है।
कैश और सोने को मिलाकर बरामद संपत्ति का अनुमानित मूल्य 50 करोड़ रुपये के करीब बताया जा रहा है।
बस ड्राइवर ने किसका बताया पूरा पैसा?
पुलिस पूछताछ में मोहम्मद मिनार मंडल ने दावा किया कि बरामद नकदी और सोना उसका नहीं है। उसके मुताबिक यह पूरा पैसा तुलु मंडल का है।
जांच में सामने आया कि तुलु मंडल का वास्तविक नाम मोहम्मद नजीबुद्दीन है। वह बीरभूम में पत्थर के कारोबार से जुड़ा हुआ है और स्टोन क्रशिंग का काम करता है। मिनार मंडल ने बताया कि वह तुलु मंडल का रिश्तेदार होने के साथ उसके कारोबार का मैनेजर भी है।
TMC नेता अणुव्रत मंडल से जुड़ रहा नाम
पुलिस जांच में तुलु मंडल का नाम तृणमूल कांग्रेस के नेता अणुव्रत मंडल के करीबी के रूप में सामने आया है। अणुव्रत मंडल फिलहाल पशु तस्करी से जुड़े मामले में जमानत पर हैं।
मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस तुलु मंडल के ठिकाने पर पहुंची, लेकिन वह पहले ही फरार हो चुका था। पुलिस ने पूरे कैश और सोने को जब्त कर लिया है तथा मिनार मंडल के घर को सील कर दिया है।
साधारण घर देखकर पुलिस भी रह गई थी हैरान
जिस मकान से करोड़ों रुपये और सोना मिला, वह बाहर से बेहद सामान्य दिखाई देता था। दीवारों पर सीलन, पुराना रंग-रोगन और साधारण रहन-सहन देखकर किसी को भी अंदाजा नहीं हो सकता था कि अंदर करोड़ों रुपये छिपाए गए हैं।
इलाके के लोगों का कहना है कि मिनार मंडल हमेशा बेहद सामान्य जीवन जीता था। उसके घर से इतनी बड़ी बरामदगी की खबर सामने आने के बाद पूरा इलाका हैरान है।
ट्यूशन पढ़ाने से पत्थर कारोबार तक का सफर
जांच में यह भी सामने आया कि करीब 25 साल पहले तुलु मंडल घर-घर जाकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था और उसकी मासिक आय करीब तीन हजार रुपये थी। वर्ष 2014 तक उसकी आजीविका इसी पर निर्भर थी।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2014 में वह अणुव्रत मंडल के संपर्क में आया और बाद में उनका करीबी बन गया। वर्ष 2016 में उसे बीरभूम में स्टोन माइनिंग से जुड़े सरकारी टैक्स वसूली का ठेका मिला। इसके बाद उसके कारोबार में तेजी से विस्तार हुआ।
सरकारी राजस्व में गड़बड़ी की आशंका
पुलिस को संदेह है कि बरामद रकम सरकारी राजस्व से जुड़ी हो सकती है। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं स्टोन कारोबारियों से वसूला गया राजस्व सरकारी खजाने में जमा कराने के बजाय कथित तौर पर निजी तौर पर तो नहीं रखा गया।
प्रारंभिक जांच में यह भी आशंका जताई गई है कि कारोबारियों को कथित रूप से नकली रसीदें जारी कर करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की गई हो। इसी पूरे वित्तीय लेनदेन की जांच अब पुलिस कर रही है।