नया साल आते ही ज्यादातर लोग हेल्थ और फिटनेस को लेकर बड़े-बड़े रेजोल्यूशन लेते हैं। कोई नई डाइट ट्राई करता है, कोई महंगे सप्लीमेंट्स खरीदता है, तो कोई सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रेंड्स को फॉलो करने लगता है। लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो अच्छी सेहत का रास्ता किसी शॉर्टकट या फैंसी रूटीन से नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की आसान आदतों से होकर जाता है।
आज के दौर में प्रोटीन पाउडर, फाइबर सप्लीमेंट और सुपरफूड का खूब प्रचार हो रहा है। जबकि सच यह है कि अगर आपकी थाली में फल, सब्ज़ियां, दालें, साबुत अनाज और नट्स शामिल हैं, तो शरीर को ज़रूरी पोषण अपने आप मिल जाता है। जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट लेना फायदे के बजाय नुकसानदेह भी हो सकता है। दिल को हेल्दी रखने के लिए संतुलित खाना, कम प्रोसेस्ड फूड और सीमित नमक-शुगर सबसे जरूरी है।

इसी तरह स्किन केयर और वेलनेस रूटीन को लेकर भी लोग उलझन में रहते हैं। महंगे सीरम, लंबी स्किन केयर लिस्ट या घंटों चलने वाले रूटीन की ज़रूरत नहीं। डॉक्टरों का कहना है कि साफ़-सफाई, मॉइस्चराइज़र और सनस्क्रीन जैसी बेसिक चीज़ें ही काफी हैं।
फिटनेस के नाम पर जिम जाना ज़रूरी नहीं। रोज़ाना 30 मिनट की तेज़ चाल, हल्की एक्सरसाइज़, स्ट्रेचिंग या बॉडी-वेट वर्कआउट भी दिल की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। लगातार एक्टिव रहने से ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और वजन कंट्रोल में रहता है।

अक्सर लोग नींद और तनाव को हल्के में ले लेते हैं, जबकि यही दो चीज़ें दिल की सेहत पर गहरा असर डालती हैं। 7–8 घंटे की अच्छी नींद, स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल और रोज़ कुछ पल खुद के लिए निकालना हार्ट डिजीज के खतरे को कम करता है। मेडिटेशन, गहरी सांसें या शांत म्यूजिक भी स्ट्रेस घटाने में मददगार है।
सबसे अहम बात हर नए वेलनेस ट्रेंड या मैजिक ट्रीटमेंट पर आंख बंद कर भरोसा न करें। IV थेरेपी, अनावश्यक टेस्ट या बिना जरूरत डिवाइस इस्तेमाल करने से बेहतर है कि आप अपने डॉक्टर से सलाह लें। नियमित हेल्थ चेकअप से कई बीमारियों को समय रहते रोका जा सकता है।
2026 में हेल्दी रहने का असली फॉर्मूला यही है, सादा खाना, रोज़ की हल्की एक्सरसाइज़, पूरी नींद, कम तनाव और भरोसेमंद जानकारी। यही आदतें न सिर्फ आज, बल्कि आने वाले सालों तक आपकी सेहत का साथ निभाएंगी।