नई दिल्ली। रूस के साइबेरिया स्थित इरकुत्स्क क्षेत्र में एक 28 वर्षीय लैब कर्मचारी की मौत के बाद संभावित न्यूमोनिक प्लेग को लेकर चिंता बढ़ गई है। मृतका इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थी। उसकी मौत के बाद उसके संपर्क में आए करीब 200 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है और कुछ अस्पतालों में एहतियाती कदम उठाए गए हैं। हालांकि, सबसे अहम बात यह है कि रूस की स्वास्थ्य एजेंसी ने अभी तक उसकी मौत की वजह प्लेग होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
आखिर मामला क्या है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतका दार्या शिपिलोवा 25 सितंबर को लैब में काम कर रही थीं, तभी एक टेस्ट ट्यूब टूटने की बात सामने आई। दावा किया गया कि इसमें Yersinia pestis बैक्टीरिया मौजूद था, जो प्लेग का कारण बनता है। इसके कुछ दिनों बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें गंभीर निमोनिया जैसे लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया। वेंटिलेटर पर रखने के बावजूद उनकी मौत हो गई।
हालांकि, इस पूरी घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। रूस की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने बीमारी को फिलहाल अज्ञात कारण का निमोनिया बताया है और कहा है कि जांच में ऐसा कोई सूक्ष्मजीव नहीं मिला, जिसका सीधे तौर पर उनके काम से संबंध साबित हो।
फिर करीब 200 लोगों की निगरानी क्यों?
मामले में सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर है कि मृतका के संपर्क में आए करीब 200 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 189 लोगों को अलग-अलग चिकित्सा केंद्रों में निगरानी में रखा गया है। अभी तक निगरानी में रखे गए लोगों में संक्रमण की पुष्टि होने की रिपोर्ट नहीं है।
इरकुत्स्क और शेलेखोव इलाके में एहतियाती कदम भी उठाए गए हैं। कुछ अस्पतालों में प्रतिबंध लगाए गए हैं, जबकि शेलेखोव स्थित एक बड़े औद्योगिक प्लांट में कर्मचारियों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
अमेरिका भी मामले पर नजर रख रहा
मामला अब अंतरराष्ट्रीय निगरानी में भी आ गया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इरकुत्स्क में संदिग्ध न्यूमोनिक प्लेग से मौत की रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए कहा है कि वह CDC और अन्य एजेंसियों के साथ स्थिति पर नजर रख रहा है। अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि मामले से जुड़े कई तथ्य अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।
क्या न्यूमोनिक प्लेग कोविड से 100 गुना ज्यादा खतरनाक है?
सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में इस मामले को कोविड के शुरुआती दौर से जोड़कर “वुहान पार्ट-2” जैसी तुलना की जा रही है। साथ ही यह दावा भी किया जा रहा है कि प्लेग कोविड से 100 गुना ज्यादा जानलेवा है। इन दावों को फिलहाल तथ्य के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक प्लेग Yersinia pestis बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। इसका न्यूमोनिक रूप गंभीर होता है और संक्रमित व्यक्ति से सांस के जरिए निकलने वाले संक्रमणकारी कणों से फैल सकता है। लेकिन समय पर सही एंटीबायोटिक उपचार मिलने पर प्लेग का इलाज संभव है।
न्यूमोनिक प्लेग कितना खतरनाक?
न्यूमोनिक प्लेग प्लेग का सबसे गंभीर रूप माना जाता है। CDC के मुताबिक इसके लक्षण संक्रमण के बाद बेहद कम समय में सामने आ सकते हैं। तेज बुखार, कमजोरी, खांसी, सांस लेने में परेशानी और सीने में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। अगर इलाज में देरी हो तो बीमारी तेजी से गंभीर हो सकती है।
WHO के मुताबिक बिना इलाज के न्यूमोनिक प्लेग जानलेवा हो सकता है, लेकिन जल्दी पहचान और एंटीबायोटिक उपचार से मरीज के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
क्या रूस में नई महामारी का खतरा है?
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। फिलहाल एक मौत के मामले में प्लेग का संदेह है, लेकिन रूस की आधिकारिक स्वास्थ्य एजेंसी ने बीमारी की पुष्टि नहीं की है। साथ ही निगरानी में रखे गए लोगों में संक्रमण की पुष्टि की खबर भी नहीं है। इसलिए इसे नई महामारी या “वुहान पार्ट-2” कहना अभी तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि दार्या शिपिलोवा की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और क्या इसका उनके लैब में काम करने से कोई संबंध था। जांच के नतीजे इस पूरे मामले की तस्वीर साफ कर सकते हैं।