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जिस फांसी से रातोंरात बचा था सुरेंद्र कोली, उसी सितंबर में खुद लगा ली फांसी… 2014 की वो रात जब आखिरी वक्त पर बदल गया था फैसला

नई दिल्ली: निठारी कांड में कई बच्चों और महिलाओं की हत्या के आरोपों में लंबे समय तक जेल में रहे सुरेंद्र कोली की मौत ने 2014 की उस रात की यादें ताजा कर दी हैं, जब उसकी फांसी आखिरी वक्त पर टल गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में उसे सभी 13 मामलों में बरी कर दिया था। 2025 में आखिरी मामले में भी बरी होने के बाद उसे जेल से रिहा कर दिया गया था। इसके बाद कुछ समय दिल्ली में रहने के बाद वह हरिद्वार चला गया था। अब सितंबर में ही उसने फांसी लगाकर जान दे दी।

2014 में भी सितंबर की ही रात, जब सामने आई फांसी की खबर

साल 2014 का सितंबर महीना था। रविवार 7 सितंबर को मेरठ की सेंट्रल जेल से खबर सामने आई कि निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को अगले दिन यानी सोमवार को फांसी दी जानी है। फांसी के लिए महज एक दिन का समय बचा था और रविवार होने के कारण अदालत बंद थी। ऐसे में कानूनी रास्ता तलाशना चुनौती थी।

इसी दौरान वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा से मिलने का समय मांगा। इसके बाद वरिष्ठ न्यायाधीश एचएल दत्तू के आवास पर विशेष अदालत की सुनवाई हुई।

रात करीब एक बजे अदालत ने दिया एक सप्ताह का वक्त

सुनवाई देर रात तक चली। करीब रात एक बजे अदालत ने सुरेंद्र कोली को एक सप्ताह का समय देने का फैसला सुनाया। इस आदेश के साथ उसकी अगले दिन होने वाली फांसी टल गई।

इंदिरा जयसिंह की दलील थी कि संविधान के तहत मृत्युदंड के मामले में अंतिम निर्णय से पहले आरोपी को अदालत में अपनी बात रखने का एक और अवसर मिलना चाहिए। उनका कहना था कि पुनर्विचार याचिका खारिज हो जाने के बाद भी फांसी से पहले खुले न्यायालय में मामले की सुनवाई का मौका दिया जा सकता है। इसी आधार पर कोली को भी एक अवसर देने की मांग की गई थी।

रातोंरात मेरठ प्रशासन तक पहुंचा था फैसला

अदालत के फैसले के बाद मेरठ के तत्कालीन जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को रात में ही फोन के जरिए फांसी टलने की जानकारी दी गई थी। उन्हें बताया गया था कि आदेश की लिखित प्रति जल्द पहुंच जाएगी। इसके बाद सुबह तक प्रशासन के पास फैसले की प्रति पहुंच गई और सुरेंद्र कोली की फांसी टल गई।

इसके बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी और आखिरकार सुरेंद्र कोली को सभी 13 मामलों में बरी कर दिया गया। 2025 में आखिरी मामले में भी उसे अदालत से राहत मिली और जेल से रिहा कर दिया गया।

फांसी से बचने के बाद गुमनाम जिंदगी, फिर सामने आई मौत की खबर

जेल से बाहर आने के बाद सुरेंद्र कोली कुछ समय दिल्ली में रहा और फिर हरिद्वार में रहने लगा। पिछले कुछ समय से वह अपेक्षाकृत गुमनाम जिंदगी जी रहा था। इसके बाद 18 सितंबर 2026 को उसके फांसी लगाकर जान देने की खबर सामने आई।

जिस सितंबर महीने में 2014 में उसकी फांसी आखिरी वक्त पर टल गई थी, उसी महीने साल 2026 में उसकी मौत की खबर आई। अदालत के उस फैसले ने करीब 12 साल पहले उसकी जान बचाई थी, लेकिन इस बार उसने खुद फंदा लगाकर जान दे दी।

vineet verma

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