नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार पर युवाओं से किए गए वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर वापस लेने या रद्द करने और नीट पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने जैसे वादों पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। सीजेपी ने साफ किया है कि 24 अगस्त को उसकी राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी और जरूरत पड़ने पर देशभर में फिर शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
सीजेपी ने रविवार को जारी बयान में कहा कि सरकार के साथ बातचीत के बाद उसने अपना आंदोलन अच्छी नीयत से वापस लिया था। पार्टी का दावा है कि युवाओं से किए गए वादों को अब कमजोर करने, उनमें देरी करने या उनका अलग अर्थ निकालने की कोशिश भरोसे का गंभीर उल्लंघन होगी। पार्टी ने कहा कि वह तब तक चैन से नहीं बैठेगी, जब तक युवाओं से किए गए सभी वादे पूरे नहीं हो जाते।
सुप्रीम कोर्ट में एफआईआर को लेकर क्या हुआ?
सीजेपी के मुताबिक, 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से देशभर में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की एक साथ सूची देने को तीन बार कहा था। पार्टी का कहना है कि इस सूची के आधार पर अदालत संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर सभी मामलों को एक साथ रद्द कर सकती है।
सीजेपी का आरोप है कि अदालत की ओर से बार-बार सूची मांगे जाने के बावजूद केंद्र सरकार ने इसे उपलब्ध कराने का वादा नहीं किया। इसके बाद पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर युवाओं को धोखा देने की कोशिश का आरोप लगाया।
‘एफआईआर वापस लेने का वादा साफ था’
पार्टी ने अपने बयान में कहा कि सरकार के साथ हुए समझौते में विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी सभी एफआईआर वापस लेने या रद्द करने और भविष्य में किसी छात्र या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया गया था।
सीजेपी का कहना है कि इन वादों को कमजोर करना, इनमें देरी करना, उनका नया अर्थ निकालना या उन्हें नजरअंदाज करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। पार्टी ने इसे देश के युवाओं के साथ विश्वासघात बताया है।
सरकारी प्रतिनिधियों पर भी उठाए सवाल
सीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि उसके साथ बातचीत करने वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडल की ओर से अब तक औपचारिक संपर्क नहीं किया गया है। पार्टी के मुताबिक, सरकार की ओर से दिए गए लिखित भरोसे को जल्द उपलब्ध कराने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी उसे नहीं दी गई है।
पार्टी ने कहा कि इसमें प्रदर्शन से जुड़ी एफआईआर के अलावा मृतक नीट पीड़ितों के परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देने का वादा भी शामिल है।
24 अगस्त को तय होगी अगली रणनीति
सीजेपी ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए 24 अगस्त को राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक बुलाई है। इसमें सरकार के साथ हुए वादों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी और संगठन के अगले कदम पर फैसला होगा।
पार्टी ने कहा है कि सरकार से अपने वादे पूरे करवाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। इसमें जरूरत पड़ने पर देशभर में शांतिपूर्ण आंदोलन का एक और दौर शुरू करना भी शामिल है। सीजेपी ने कहा कि उसके आंदोलन को वापस लेने की अच्छी नीयत को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
‘युवाओं से किया हर वादा पूरा होने तक नहीं बैठेंगे’
सीजेपी ने कहा कि भारत के युवाओं से किया गया वादा केवल शब्दों में नहीं, बल्कि उसकी भावना के अनुरूप भी पूरा होना चाहिए। पार्टी ने छात्रों, युवा नागरिकों, समर्थकों और अपने कार्यकर्ताओं से 24 अगस्त को होने वाली बैठक के बाद की स्थिति के लिए तैयार रहने की अपील की है।
पार्टी ने दावा किया कि प्रदर्शनों के कारण धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। साथ ही दोहराया कि युवा पीढ़ी से किया गया हर वादा पूरा होने तक वह चैन से नहीं बैठेगी।