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रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: पहली बार $1 की कीमत ₹96.23 के पार, जानें क्यों क्रैश हुई भारतीय करेंसी और आप पर क्या होगा असर

news desk
Last updated: May 18, 2026 11:38 am
news desk
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मुंबई/नई दिल्ली। ग्लोबल मार्केट में मचे हड़कंप के बीच सोमवार (18 मई) को भारतीय करेंसी को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया (Indian Rupee) इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार मजबूत हो रहे डॉलर के कारण पहली बार एक डॉलर की कीमत 96.23 रुपये के रिकॉर्ड स्तर को छू गई है।

Contents
क्यों टूटा रुपया? ये हैं 3 सबसे बड़ी वजहें (Key Factors)1. कच्चे तेल की कीमतों में भयंकर उबाल2. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर संकट3. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछालएक्शन में रिजर्व बैंक: क्या संभलेगा रुपया?महंगाई की मार: आम आदमी की जेब पर कैसे होगा असर?

इससे पहले शुक्रवार को बाजार बंद होने पर रुपया 95.97 के स्तर पर था, लेकिन वीकेंड के बाद सोमवार को बाजार खुलते ही निवेशकों ने भारी बिकवाली शुरू कर दी, जिससे रुपया संभल नहीं सका।

क्यों टूटा रुपया? ये हैं 3 सबसे बड़ी वजहें (Key Factors)

भारतीय मुद्रा में आई इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं:

1. कच्चे तेल की कीमतों में भयंकर उबाल

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल के बाजार में आग लगा दी है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) 111 डॉलर प्रति बैरल के बेहद खतरनाक स्तर को पार कर चुका है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ेगा, जिसने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है।

2. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर संकट

दुनिया भर की ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले ‘होर्मुज स्ट्रेट’ समुद्री मार्ग पर रुकावट की आशंका बनी हुई है। इस रूट पर किसी भी तरह के व्यवधान के डर से ग्लोबल इनवेस्टर्स सुरक्षित निवेश की तलाश में उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं।

3. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल

अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी यील्ड (Bond Yield) बढ़कर 4.625% पर पहुंच गई है। वैश्विक निवेशकों को डर है कि दुनिया भर में महंगाई लंबे समय तक बनी रह सकती है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) ब्याज दरों को सख्त रख सकता है। अमेरिकी बॉन्ड्स में बेहतर रिटर्न मिलने के कारण विदेशी निवेशक भारत जैसे देशों से डॉलर निकाल रहे हैं।

एक्शन में रिजर्व बैंक: क्या संभलेगा रुपया?

विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। बाजार के एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपये को 96 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे जाने से रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार (15 मई) को भी अप्रत्यक्ष रूप से बाजार में दखल दिया था और डॉलर बेचे थे।

जानकारों की राय

इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि आरबीआई किसी एक निश्चित स्तर को बचाने के लिए जिद नहीं करेगा, बल्कि उसका मुख्य फोकस रुपये में आने वाले अचानक और बड़े उतार-चढ़ाव (Volatility) को नियंत्रित करना है। मौजूदा ग्लोबल सेंटीमेंट्स को देखते हुए गिरावट के इस सिलसिले को तुरंत रोक पाना काफी चुनौतीपूर्ण होगा।

महंगाई की मार: आम आदमी की जेब पर कैसे होगा असर?

कमजोर रुपया और महंगा कच्चा तेल सीधे तौर पर देश में आयातित महंगाई (Imported Inflation) को बढ़ावा देते हैं:

  • महंगे होंगे गैजेट्स और गाड़ियां: भारत विदेशों से जो भी सामान जैसे- कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और केमिकल आयात करता है, उसके लिए अब ज्यादा डॉलर चुकाने होंगे, जिससे ये उत्पाद महंगे हो जाएंगे।
  • बढ़ेगा व्यापार घाटा: लंबे समय तक रुपये के कमजोर रहने से देश का चालू खाते का घाटा (CAD) बढ़ सकता है, जिससे वित्तीय संतुलन पर दबाव बढ़ेगा।
  • ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट: क्रूड महंगा होने से देश के भीतर लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजों और जरूरी सामानों की कीमतों पर पड़ेगा।

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TAGGED: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमत, डॉलर बनाम रुपया, ब्रेंट क्रूड $111, भारतीय अर्थव्यवस्था, भारतीय रिजर्व बैंक, महंगाई की मार, रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, होर्मुज जलडमरूमध्य संकट
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