अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और अन्य मूल्यवान वस्तुओं से जुड़े मामले की जांच के बीच मंदिर की व्यवस्थाओं में बड़ा बदलाव किया गया है। पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा के दो करीबियों केडी तिवारी उर्फ बड़े बाबू और बजरंग पाठक को मंदिर की व्यवस्था से हटा दिया गया है। साथ ही, दोनों के राम मंदिर परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है। बताया जा रहा है कि मंगलवार से दोनों मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं कर रहे हैं।
दोनों को पहले शिकायत के आधार पर नोटिस दिया गया था। इसके बाद उन्हें राम मंदिर की व्यवस्थाओं से हटाकर बाग बिजैसी स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम भेज दिया गया।
किसकी क्या जिम्मेदारी थी?
केडी तिवारी रामलला के आभूषणों और श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई जाने वाली मूल्यवान वस्तुओं के हिसाब-किताब से जुड़े काम देखते थे। वहीं, बजरंग पाठक वीआईपी दर्शनार्थियों के लिए प्रसाद, अंगवस्त्र और अन्य भेंट की व्यवस्था संभालते थे।
महिला CO की शिकायत के बाद कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर में तैनात एक महिला क्षेत्राधिकारी की शिकायत के बाद यह कार्रवाई की गई। दर्शन के दौरान प्रसाद की व्यवस्था को लेकर बजरंग पाठक और महिला CO के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद शिकायत दर्ज कराई गई और दोनों को नोटिस दिया गया।
चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच के बीच मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं में हुए इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
SIT की रिपोर्ट के बीच संतों से मुलाकातें तेज
राम मंदिर से जुड़े मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर ली है। रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के साथ साझा किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष दिए गए हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
इस बीच ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा के साधु-संतों से मुलाकात करने की खबरें भी सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, मिश्रा अलग-अलग स्थानों पर छोटी बैठकों के जरिए अपने और चंपत राय पर लगे आरोपों को साजिश बताते हुए खारिज कर रहे हैं।
कुछ संतों ने चंपत राय के समर्थन में भी खुलकर बयान दिए हैं और उन्हें निर्दोष बताया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच
मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गठित SIT कर रही है। जांच एजेंसी को अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करनी है। इससे पहले प्रदेश सरकार की ओर से कराई गई शुरुआती जांच में चंपत राय और अनिल मिश्रा के नाम शामिल नहीं होने की बात सामने आई थी।
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ा मामला जून के पहले सप्ताह में सामने आया था। इसके बाद यह मामला राजनीतिक विवाद का भी विषय बना। मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। अब मंदिर की व्यवस्थाओं में हुए ताजा बदलाव ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।