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Indian Press House > Blog > Trending News > “ट्रंप की डेडलाइन को ईरान ने दिखाया ठेंगा! पुतिन के साथ मिलकर बनाया ‘सुरक्षा कवच’, क्या अब अमेरिका पीछे हटेगा?”
Trending Newsवर्ल्ड

“ट्रंप की डेडलाइन को ईरान ने दिखाया ठेंगा! पुतिन के साथ मिलकर बनाया ‘सुरक्षा कवच’, क्या अब अमेरिका पीछे हटेगा?”

news desk
Last updated: April 28, 2026 3:55 pm
news desk
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तेहरान/मॉस्को। मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के रिश्तों में तल्खी चरम पर पहुंच गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समझौते के लिए दी जा रही ‘डेडलाइन’ और चेतावनियों का ईरान पर कोई असर नहीं दिख रहा है।

Contents
अरागची का मॉस्को दौरा और 3 बड़ी शर्तेंक्यों अभेद्य बन गया है रूस-ईरान गठबंधन?युद्ध अब अमेरिका के लिए हुआ महंगागठबंधन की सीमाएं और रूस की चालमहंगा और थका देने वाला संघर्षवैश्विक युद्ध का खतरा

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के आगे घुटने नहीं टेकेगा। इस बीच, रूस और ईरान की बढ़ती नजदीकियों ने व्हाइट हाउस की नींद उड़ा दी है।

अरागची का मॉस्को दौरा और 3 बड़ी शर्तें

ईरानी विदेश मंत्री ने हाल ही में पाकिस्तान, ओमान और रूस की यात्रा कर अपना पक्ष मजबूत किया है। मॉस्को में उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी दबाव में सरेंडर नहीं करेगा। ईरान ने समझौते के लिए अमेरिका के सामने 3 प्रमुख शर्तें रखी हैं। अरागची के अनुसार, ट्रंप प्रशासन की अनुचित मांगें ही कूटनीतिक समाधान में सबसे बड़ी बाधा हैं।

क्यों अभेद्य बन गया है रूस-ईरान गठबंधन?

  • जनवरी 2025 में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच हुए 20 वर्षीय व्यापक सामरिक साझेदारी समझौते ने इस गठबंधन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।
  • रक्षा और खुफिया: रूस अब ईरान को उन्नत सैन्य तकनीक और खुफिया जानकारी साझा कर रहा है।
  • प्रतिबंधों की काट: दोनों देश मिलकर अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों से बचने का रास्ता निकाल रहे हैं।
  • ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का असर: फरवरी 2026 में अमेरिका-इजराइल के ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के बाद ईरान ने अपनी रक्षा प्रणालियों को रूस की मदद से और अधिक मजबूत किया है।

युद्ध अब अमेरिका के लिए हुआ महंगा

विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम लीडर अली खामनेई से जुड़ी घटनाओं और पिछले युद्धों ने भले ही ईरानी व्यवस्था को झटका दिया हो, लेकिन रूस के साथ इस साझेदारी ने अब किसी भी सीधे सैन्य संघर्ष को अमेरिका के लिए बेहद ‘महंगा और जटिल’ बना दिया है। पुतिन का खुला समर्थन ट्रंप के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन गया है।

गठबंधन की सीमाएं और रूस की चाल

यह समझना जरूरी है कि रूस और ईरान के बीच कोई ‘नाटो’ जैसा रक्षा समझौता नहीं है। 2025-26 के संघर्षों के दौरान भी रूस ने खुद को कूटनीतिक निंदा और सीमित तकनीकी सहायता तक ही सीमित रखा। रूस ने कभी भी प्रत्यक्ष रूप से अपनी सेना ईरान के समर्थन में नहीं उतारी। इसके बावजूद, रूस की महज मौजूदगी ही अमेरिका को पूर्ण पैमाने (Full-scale) की सैन्य कार्रवाई से रोकने के लिए काफी रही है।

महंगा और थका देने वाला संघर्ष

ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति को ‘एसिमिट्रिक वॉरफेयर’ पर केंद्रित किया है। सस्ते लेकिन घातक ड्रोनों, लंबी दूरी की मिसाइलों और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों के उपयोग ने युद्ध को बहुत लंबा और खर्चीला बना दिया है। अमेरिका के लिए अब चुनौती सिर्फ सैन्य नहीं है; उसे अब आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर रूस और चीन के उस साझा नेटवर्क का सामना करना पड़ रहा है जो वैश्विक व्यवस्था को चुनौती दे रहा है।

वैश्विक युद्ध का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि अब ईरान पर कोई भी बड़ा हमला केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहेगा, बल्कि यह तेजी से वैश्विक युद्ध (Global Conflict) में तब्दील हो सकता है। यही कारण है कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ जैसी कार्रवाइयों के बावजूद, अमेरिका अब सीधे टकराव के बजाय प्रतिबंधों और दबाव की नीति पर अधिक निर्भर है।

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TAGGED: Asymmetric Warfare Iran, Geopolitics 2026, Global Conflict Risk, Iran Missile Strategy, Russia China Iran Network, Russia Iran Alliance Limits, Ukraine vs Iran Conflict, US Foreign Policy Middle East, अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ईरान-रूस संबंध.
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