अम्मान: जॉर्डन के दक्षिणी प्रांत कराक में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को एक चर्च में अंतिम संस्कार के दौरान अचानक गोलियां गूंजने लगीं। हथियारों से लैस दो अज्ञात हमलावरों ने वहां मौजूद लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य घायल हो गए। वारदात राजधानी अम्मान से करीब 145 किलोमीटर दूर हमूद कस्बे के ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च में हुई। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके की घेराबंदी कर दी और हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है।
गाड़ी से उतरे और भीड़ पर शुरू कर दी फायरिंग
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अंतिम संस्कार के दौरान चर्च में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इसी बीच एक गाड़ी से दो संदिग्ध हथियारबंद व्यक्ति उतरे और वहां मौजूद लोगों पर गोलियां चलाने लगे। बताया गया है कि एक हमलावर के पास एके-47 कलाश्निकोव राइफल थी, जबकि दूसरे के हाथ में पिस्तौल थी।
प्रत्यक्षदर्शी खालिद बुरकान के अनुसार, अंतिम संस्कार में दर्जनों लोग शामिल हुए थे। अचानक हुई गोलीबारी से वहां अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हमलावरों ने कई मिनट तक गोलियां चलाईं और फिर मौके से फरार हो गए।
7 लोगों की मौत, घायलों की हालत पर नजर
गोलीबारी में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई, जबकि 10 अन्य घायल हो गए। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई है।
घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल और पुलिस मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने चर्च और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। जांच एजेंसियां हमलावरों की पहचान करने और उनके भागने के रास्ते का पता लगाने में जुटी हैं।
जॉर्डन सरकार ने शुरू की जांच, अब तक किसी ने नहीं ली जिम्मेदारी
जॉर्डन सरकार के प्रवक्ता मोहम्मद अल-मोमानी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बयान जारी कर बताया कि कराक में हुई गोलीबारी की जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां घटना से जुड़े तथ्यों का पता लगाने में जुटी हैं।
पुलिस और सेना आसपास लगे निगरानी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं, ताकि संदिग्धों की पहचान की जा सके। फिलहाल किसी भी आतंकी या विद्रोही संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। जांच पूरी होने के बाद ही वारदात के पीछे की वजह स्पष्ट हो सकेगी।
जॉर्डन जैसे स्थिर देश में हमला क्यों अहम?
पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में जारी तनाव के बीच जॉर्डन को अपेक्षाकृत स्थिर देश माना जाता रहा है। यहां इस तरह की बड़ी गोलीबारी की घटनाएं असामान्य मानी जाती हैं। ऐसे में धार्मिक स्थल पर हुआ यह हमला सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करता है।
जॉर्डन में ईसाई समुदाय अल्पसंख्यक है। देश में कई ऐतिहासिक चर्च और बाइबिल से जुड़े धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जहां हर साल बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे स्थानों पर सुरक्षा बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा की चुनौती
हाल के महीनों में मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। हालांकि, जॉर्डन के चर्च में हुई गोलीबारी का इन घटनाक्रमों से कोई संबंध है या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल जांच एजेंसियों का ध्यान हमलावरों की पहचान, उनके मकसद और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं का पता लगाने पर है। जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि धार्मिक स्थल को निशाना बनाने के पीछे क्या वजह थी।