जम्मू-कश्मीर में भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (LoC) के पास शनिवार तड़के सेना ने एक बड़े आतंकी मंसूबने को नाकाम कर दिया। कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर स्थित जुमागुंड इलाके में सुबह करीब 3:30 बजे जैसे ही अंधेरे को चीरती हुई गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजी, वैसे ही इलाके में हड़कंप मच गया। सतर्क जवानों और घुसपैठियों के बीच हुई इस भीषण मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया है। इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है, और सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह किसी बड़ी घुसपैठ की साजिश का हिस्सा था या नहीं।
केरन सेक्टर में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी और मुठभेड़
अधिकारियों के मुताबिक, उत्तरी कश्मीर जिले के केरन सेक्टर के जुमगुंड इलाके में LoC के पास तैनात सतर्क जवानों ने कुछ संदिग्ध गतिविधियां भांप ली थीं। बिना देर किए जवानों ने आतंकवादियों को ललकारा और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद दोनों तरफ से शुरू हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह एक सोची-समझी घुसपैठ की कोशिश थी या स्थानीय स्तर पर किसी अन्य साजिश का हिस्सा।
ठीक एक महीने पहले उधमपुर में भी मारे गए थे दो आतंकी
यह घटना ठीक एक महीने पहले—यानी 17 सितंबर, 2026 को—जम्मू के उधमपुर जिले में हुए एक ऑपरेशन की याद दिलाती है, जहां सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के दो पाकिस्तानी आतंकवादियों (सद्दाम और मुस्तफा) को ढेर कर दिया था और एक संदिग्ध को हिरासत में लिया था।
उस दौरान पुलिस ने उनके पास से एक एके असॉल्ट राइफल (चार मैगजीन के साथ), एक M4 कार्बाइन (तीन मैगजीन के साथ), एक ग्लॉक पिस्तौल (दो मैगजीन के साथ) और चार ग्रेनेड भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए थे।
सर्दियों से पहले घुसपैठ की फिराक में आतंकी, सेना हाई अलर्ट पर
सीमा पार बैठे आतंकियों की हमेशा यह कोशिश रहती है कि सर्दियों की शुरुआत होने से पहले घाटी में घुसपैठ कर ली जाए। दरअसल, भारी बर्फबारी के कारण पहाड़ी दर्रे बंद हो जाते हैं और कई रास्ते दुर्गम हो जाते हैं, जिससे घुसपैठ के पारंपरिक रास्ते बंद हो जाते हैं।
यही वजह है कि इन महीनों में नियंत्रण रेखा के संवेदनशील हिस्सों पर सेना अपनी निगरानी और गश्त कई गुना बढ़ा देती है, ताकि किसी भी नापाक हरकत को वक्त रहते रोका जा सके।