नई दिल्ली: वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रहों से जुड़े अलग-अलग रत्नों का उल्लेख मिलता है। गुरु बृहस्पति का संबंध पुखराज रत्न से माना जाता है, लेकिन इसकी ऊंची कीमत के कारण हर व्यक्ति इसे धारण नहीं कर पाता। ज्योतिष शास्त्र में ऐसे लोगों के लिए केले के पेड़ की जड़ को एक वैकल्पिक उपाय के रूप में बताया गया है। मान्यता है कि विधि-विधान से इसे धारण करने पर गुरु ग्रह की शुभता प्राप्त हो सकती है।
केले के पेड़ की जड़ को क्यों माना जाता है खास?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार केले के पेड़ का संबंध गुरु बृहस्पति से माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि केले के पेड़ की जड़ धारण करने से व्यक्ति के ज्ञान, सकारात्मक सोच और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार हो सकता है। विशेष रूप से विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोध कार्य से जुड़े लोगों के लिए इसे लाभकारी माना गया है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यदि संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हो या गुरु ग्रह से जुड़े कारणों की वजह से विवाह में विलंब हो रहा हो, तो केले की जड़ धारण करने की सलाह दी जाती है।
किन लोगों के लिए बताया गया है शुभ?
ज्योतिष मान्यता के अनुसार मेष, धनु और मीन राशि के जातक केले के पेड़ की जड़ धारण कर सकते हैं। इसके अलावा यदि जन्म कुंडली में गुरु ग्रह लग्न, पंचम या नवम भाव में शुभ स्थिति में हो, तब भी इसे पहनना शुभ माना गया है।
शिक्षक, धर्माचार्य, ज्योतिषाचार्य और कथा वाचक जैसे कार्यों से जुड़े लोगों के लिए भी इसे धारण करना लाभकारी बताया गया है।
धारण करने की सही विधि क्या है?
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार केले के पेड़ की जड़ को विशाखा नक्षत्र में खरीदना शुभ माना जाता है। इसे गुरुवार के दिन धारण करने की सलाह दी जाती है।
धारण करने से पहले जड़ को गंगाजल से शुद्ध करें और पीले कपड़े में लपेटकर हाथ में बांधें। इसके बाद गुरु बृहस्पति के बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। साथ ही गुरु ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान मंदिर में करना भी शुभ माना गया है।
ध्यान रखने योग्य बात
ये सभी दावे और उपाय वैदिक ज्योतिष एवं पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जाता। किसी भी ज्योतिषीय उपाय को अपनाने से पहले योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहता है।