पटना: बारिश का पानी अक्सर बेहद साफ और स्वच्छ नजर आता है, इसलिए कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या इसे सीधे पीना सुरक्षित है। इस सवाल पर विशेषज्ञों का कहना है कि केवल साफ दिखाई देना इस बात की गारंटी नहीं है कि पानी पीने योग्य भी हो। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बारिश का पानी बिना शुद्ध किए पीना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
हवा में मौजूद प्रदूषक बनते हैं सबसे बड़ा खतरा
विशेषज्ञ के अनुसार, बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के कारण हवा में धूल के महीन कण, धुआं, वाहनों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषक बड़ी मात्रा में मौजूद रहते हैं। जब बारिश शुरू होती है, तो पानी की बूंदें इन हानिकारक तत्वों को अपने साथ लेकर जमीन तक पहुंचती हैं। ऐसे में यदि इस पानी को सीधे इकट्ठा कर पी लिया जाए, तो शरीर में भी ये प्रदूषक प्रवेश कर सकते हैं।
संक्रमण और पेट की समस्याओं का बढ़ सकता है जोखिम
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना शुद्ध किया गया बारिश का पानी पीने से संक्रमण, पेट संबंधी परेशानियां और लंबे समय में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए इसे सीधे पीने की सलाह नहीं दी जाती।
बारिश की बूंदें मानी जाती हैं डिस्टिल्ड वाटर जैसी
वैज्ञानिक दृष्टि से बारिश की बूंदों को डिस्टिल्ड वाटर के समान माना जाता है। इसका मतलब है कि इनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और अन्य आवश्यक प्राकृतिक खनिज लगभग नहीं के बराबर होते हैं। जबकि शरीर को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ऐसे पानी की आवश्यकता होती है, जिसमें पर्याप्त मात्रा में प्राकृतिक मिनरल्स मौजूद हों।
सिर्फ साफ दिखना नहीं, सुरक्षित होना भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी पानी का साफ दिखना पर्याप्त नहीं है। यदि उसमें आवश्यक खनिज न हों और वातावरण के प्रदूषक मिल चुके हों, तो वह पीने के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता। यही कारण है कि बारिश का पानी बिना शुद्ध किए पीने से बचने की सलाह दी जाती है।
कब पीने योग्य बन सकता है बारिश का पानी?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि बारिश के पानी को वैज्ञानिक तरीके से एकत्र किया जाए, फिर अच्छी तरह फिल्टर किया जाए और उबालने या अन्य उपयुक्त शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद इस्तेमाल किया जाए, तो इसे पेयजल के रूप में उपयोग किया जा सकता है।